
दिल्ली में जन्म लेते ही अस्पताल से मिलेगा बर्थ सर्टिफिकेट, आधार कार्ड भी आसानी से बनेगा
दिल्ली MCD ने जन्म प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए तीन बड़े बदलाव किए हैं, जिसके तहत अब संस्थागत प्रसव में बच्चे के डिस्चार्ज से पहले ही प्रमाण-पत्र मिल जाएगा, जो सीधे डिजिलॉकर में पहुंचेगा और आधार नंबर बनाने की प्रक्रिया भी ऑटोमैटिक हो जाएगी।
दिल्ली में नया बच्चा आने की खुशी अब और भी बड़ी होने वाली है। MCD ने तीन बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं, जिससे माता-पिता की सालों पुरानी भाग-दौड़ हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
दिल्ली नगर निगम (MCD) अब राजधानी के लोगों के लिए जन्म प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को आसान बनाने जा रहा है। अब माता-पिता को अपने नवजात का जन्म प्रमाणपत्र अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही थमा दिया जाएगा। यह सुविधा फिलहाल संस्थागत प्रसव (institutional births) यानी अस्पतालों और क्लीनिकों में जन्मे बच्चों के लिए लागू की जा रही है।
डिस्चार्ज लेते ही मिलेगा जन्म प्रमाण-पत्र
अब अस्पताल, नर्सिंग होम या क्लिनिक में बच्चा पैदा होने पर डिस्चार्ज से पहले मुफ्त जन्म प्रमाण-पत्र दे दिया जाएगा। MCD के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'दिल्ली में 96% डिलीवरी पहले से ही संस्थागत होती हैं। हमारा लक्ष्य जल्द ही 100% कवरेज हासिल करना है। अभी भी ज्यादातर बड़े अस्पतालों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है और परिणाम बेहद सकारात्मक हैं।'
जन्म प्रमाण-पत्र सीधे डिजिलॉकर में पहुंचेगा
MCD ने अपना पूरा सिस्टम केंद्र सरकार के डिजिलॉकर से जोड़ दिया है। अब प्रमाण-पत्र की प्रमाणित कॉपी सीधे आपके डिजिलॉकर खाते में आ जाएगी। अधिकारी ने कहा, 'अब कागज गुम होने या MCD वेबसाइट डाउन होने की कोई टेंशन नहीं। जरूरत पड़े तो कभी भी डिजिलॉकर से डाउनलोड कर सकते हैं, वह भी पूरी तरह वैध।'
आधार नंबर बनना भी हुआ ऑटोमैटिक
जन्म रजिस्ट्रेशन होते ही MCD का सिस्टम स्वयं UIDAI को सूचना भेज देगा। इसके बाद UIDAI का स्टाफ घर आकर बच्चे का आधार बनवा देगा। माता-पिता को अलग से कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दिल्ली में रोज पैदा हो रहे 837 बच्चे
2024 की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पूरे साल 3,06,459 बच्चे पैदा हुए। यानी औसतन हर दिन 837 बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें 96.09% संस्थागत और सिर्फ 3.91% घरेलू डिलीवरी थीं। लिंग अनुपात में 52.06% लड़के, 47.91% लड़कियां और 0.03% अन्य रहे।





