
दिल्ली में कोहरे का कहर जारी, अगले 3 दिन भारी, IMD ने जारी किया ऑरेंज और येलो अलर्ट
राजधानी दिल्ली में मौसम सर्द बना हुआ है। दिल्लीवालों को फिलहाल कोहरे से राहत मिलने के आसार नहीं है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को बहुत घना कोहरा छाए रहने का अलर्ट जारी किया है। दो दिन घना कोहरा छाया रहेगा।
राजधानी दिल्ली में मौसम सर्द बना हुआ है। दिल्लीवालों को फिलहाल कोहरे से राहत मिलने के आसार नहीं है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को बहुत घना कोहरा छाए रहने का अलर्ट जारी किया है। दो दिन घना कोहरा छाया रहेगा।
आईएमडी की वेबसाइट के अनुसार, शनिवार के लिए जहां घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, वहीं रविवार और सोमवार के लिए कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया गया है। राजधानी में शुक्रवार को दिन में भी आंशिक रूप से बादल छाए रहे और कई स्थानों पर दृश्यता बहुत कम दर्ज की गई। अगले 4 दिनों तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है।
पालम में दृश्यता घटकर 50 मीटर तक पहुंची
पालम में शुक्रवार को सबसे कम 50 मीटर दृश्यता दर्ज की गई, जबकि सफदरजंग में यह शून्य रही। बीते 24 घंटों के दौरान पालम और सफदरजंग में घना से बहुत घना कोहरा रहा। बीते 24 घंटों के दौरान दिल्ली में दक्षिण-पश्चिमी हवाएं 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रहेगा।
बादलों की वजह से दिल्ली की हवा और जहरीली हुई
वहीं, दिल्ली की हवा शुक्रवार को और जहरीली हो गई। घने कोहरे, हवा की धीमी रफ्तार और बादलों के कारण प्रदूषण के स्तर में तेज इजाफा हुआ है। इस कारण दिल्ली में एक दर्जन इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 या उससे अधिक दर्ज किया गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है।
वहीं, पूरे राजधानी क्षेत्र का औसत एक्यूआई 374 रहा। यह एक दिन पहले के मुकाबले एक अंक कम है, लेकिन अति गंभीर श्रेणी वाले इलाकों की संख्या में इजाफा हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ‘समीर’ ऐप के अनुसार, 40 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 14 पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि 26 केंद्रों पर यह ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रही। शनिवार तक एक्यूआई के ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बने रहने और रविवार को इसके ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचने का पूर्वानुमान जताया है।
फिलहाल राहत नहीं
दिल्ली की हवा अभी पूरी तरह साफ होने के आसार नहीं है। दरअसल, अभी दिल्ली में प्रदूषण का उत्सर्जन करने वाले तमाम स्रोत बने हुए हैं। वहीं, प्रदूषक कणों को विसर्जित करने के लिए बारिश या तेज हवा चलने जैसे मौसमी कारक नहीं बन रहे हैं।





