भीड़ में जाना महंगा पड़ेगा; क्या पेरिस-लंदन के मॉडल से दिल्ली में खत्म होगा जाम
दिल्ली के लिए मास्टर प्लान 2047 में केंद्र सरकार ने कंजेशन प्राइसिंग का सुझाव दिया है। इसके तहत भीड़भाड़ वाले इलाकों में गाड़ियों से जाना महंगा पड़ सकता है। लंदन-पेरिस जैसा शहरों में इस तरह के उपाय पहले किए जा चुके हैं और उन्हें इसका असर भी दिखा।

दिल्ली में सड़कों पर रेंगता ट्रैफिक एक स्थायी संकट बन चुका है। इस लाइलाज मर्ज का इलाज खोजने के लिए केंद्र सरकार ने मास्टर प्लान 2047 में कंजेशन प्राइसिंग का सुझाव दिया है। इसके तहत भीड़भाड़ और जाम वाले इलाकों में जाने वाले वाहनों पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया जाता है और इसके अलावा पार्किंग भी महंगी होती है। दिल्ली इस दिशा में बढ़ती है तो लंदन, पेरिस व सिंगापुर जैसे शहरों का अनुभव बताता है कि इससे सड़कों पर 30% जाम कम हो सकता है।
कहां और कैसे काम करेगा प्लान?
●पुरानी दिल्ली के घनी आबादी और संकरी गलियों वाले इलाके, जैसे चांदनी चौक, सदर बाजार, जामा मस्जिद और चावड़ी बाजार।
●राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र, जैसे कनॉट प्लेस , जनपथ और करोल बाग।
●गाड़ियों पर नजर रखने के लिए आरएफआईडी टैग/फास्टैग तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
● पार्किंग की दरें भी समय (पीक/नॉन-पीक) और इलाके की संवेदनशीलता के हिसाब से तय होंगी।
सिंगापुर (1975 से) : सबसे स्मार्ट मॉडल
●सिंगापुर ने 1975 में परमिट से शुरुआत की और 1998 में दुनिया का पहला ऑटोमेटिक इलेक्ट्रॉनिक टोल लागू किया।
●यहां चार्ज हमेशा एक जैसा नहीं रहता। इलाके, समय, गाड़ी के प्रकार और ट्रैफिक की रफ्तार देख हर तीन महीने में फीस बदलती है।
●लोग अंधाधुंध गाड़ियां न खरीदें, इसके लिए परमिट पहले नीलामी में जीतना पड़ता है।
लंदन (2003 से) : जाम 30% तक घट गया
●2003 में एंट्री फीस से शुरुआत। बाद में ज्यादा धुआं छोड़ने वाली गाड़ियों पर लगने वाले अतिरिक्त टैक्स से जोड़ा।
●नतीजा यह हुआ कि शहर में गाड़ियां 18% कम हुईं और जाम 30% घट गया। कार चलाने वाले बस और मेट्रो से चलने लगे।
●6,000 चौराहों पर सेंसर हैं। ये ट्रैफिक का दबाव देख लाल और हरी बत्ती का समय तय करते हैं।
पेरिस- सड़क संरचना में बड़ा बदलाव किया गया
●पेरिस ने टैक्स के बजाय गाड़ियों की जगह इंसानों को प्राथमिकता दी। नदी किनारे की मुख्य सड़कों को कारों के लिए बंद कर पैदल चलने वालों के लिए खोला।
●पूरे शहर में गाड़ियों की स्पीड लिमिट 30 किमी/घंटा तय कर दी और पुरानी-प्रदूषणकारी गाड़ियों पर रोक लगा दी। साथ ही सड़कों पर कारों की जगह साइकिल के लिए अलग व सुरक्षित रास्ते बनाए।
राजधानी के सामने तीन बुनियादी सवाल
क्या चांदनी चौक, करोल बाग या कनॉट प्लेस जाने वाले लोगों के पास अपनी कार छोड़ने के बाद मेट्रो/बस का इतना सुविधाजनक और आरामदायक विकल्प मौजूद है?
मेट्रो स्टेशन से उतरकर अंतिम गंतव्य (दुकान या दफ्तर) तक पहुंचने के लिए सुरक्षित ई रिक्शा, फीडर बस या वॉकवे का मजबूत नेटवर्क कैसे तैयार होगा?
क्या इस टैक्स से मिलने वाले पूरे पैसे को न्यूयॉर्क और लंदन की तरह अनिवार्य रूप से सिर्फ दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन के सुधार और पैदल सुविधाओं पर ही खर्च किया जाएगा?
मास्टर प्लान को लेकर जल्द बैठक
दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के विजन को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर डीडीए हितधारकों को शामिल करेगा। इसके तहत डीडीए ने अगले तीन माह में 20 से अधिक बैठकें आयोजित करने की योजना बनाई है। बैठकों में जन प्रतिनिधियों, सरकारी एजेंसियों, पेशेवर संस्थाओं, जमीन मालिकों और दूसरे संबंधित लोगों के साथ प्लान को लागू करने के बारे में बातचीत होगी। ये बैठकें एमपीडी-2047 के विभिन्न प्रावधानों पर केंद्रित बातचीत के लिए एक मंच प्रदान करेंगी। योजना के विजन को हकीकत में बदलने के लिए बेहतर समन्वय और भागीदारी को बढ़ावा देंगी।


