
सोने की चादर से बनवाई 2 करोड़ की भगवद गीता, दिल्ली के शख्स ने इस मठ को दिया दान
दिल्ली के एक शख्स ने सोने की चादर से बनी भगवद गीता मठ को दान की है। इस भगवाद गीता की कीमत करीब 2 करोड़ रुपए है।
देश के उद्योगपति अक्सर मंदिरों और मठों को करोड़ों रुपए का दान देते रहते हैं। जब दान की रकम बड़ी होती है, तो उसकी चर्चा भी होती है। अब चर्चा है उडुपी शहर के मंदिर को मिली एक भगवद गीता की। भगवद गीता कागज के पन्नों से नहीं बल्कि सोने की चादर से बनाई है। इसे दिल्ली के एक शख्स ने दान की है, जिसको बनाने में कुल 2 करोड़ रुपए का खर्चा आया है।
किसने दान की 2 करोड़ की सोने की गीता
सोने की चादर से बनी भगवत गीता को दिल्ली के रहने वाले लक्ष्मीनारायण ने भेंट की है। लक्ष्मीनारायण ने अनोखी भेंट के लिए विश्व गीता परायण के मौके पर पर यह भेंट दी है। इस पुस्त को पुत्तिगे मठ परंपरा से जुड़े समारोह के दौरान श्री कृ्ष्ण मठ को भेंट में दी गई है।
मठ को भेंट में मिली यह भगवद गीता अपनी कीमत के लिए ही नहीं, बल्कि इसके निर्माण के लिए भी खास है। इसको कुशल कारीगरों द्वारा 18 अध्याय के सभी सात सौ श्लोकों को सोने की प्लेट वाले पन्नों पर उकेरा गया है। इसे बनाने के लिए एक विशेष नक्काशी तकनीक का सहारा लिया गया है, जिसमें श्लोकों को सावधानी से प्लेट पर उकेरा गया है। इसमें इस बात का खास ख्याल रखा गया है कि लिखे हुए श्लोकों को पढ़ा जा सके और सोने से बनी इस पुस्तक की सुंदरता भी बनी रहे।
भक्त भी कर सकेंगे दर्शन
इस पुस्तक का मंदिर आने वाले भक्त भी दर्शन कर सकेंगे। इसके लिए इसे मठ के गीता मंदिर में रखा जाएगा, जहां भक्त इसका दर्शन कर सकेंगे।
उडुपी पहुंचने के बाद सोने से बनी भगवद गीता को एक विशेष रूप से डिजाइन किए गए सोने के रथ में रखा गया और एक शोभायात्रा करके सड़कों पर भी घुमाया गया। रथ जिधर से भी गुजर रहा था देखने वालों का तांता लगा हुआ था। इसके साथ मंत्रोच्चार और पारंपरिक गीत भी गाए जा रहे थे।





