
‘कल से गड्ढे में पड़ा था’; दिल्ली के रोहिणी में मैनहोल में गिरने से जान गंवाने वाले के बारे में चश्मदीद
दिल्ली के जनकपुरी में गड्ढे में गिरने से 25 साल के युवक की मौत के कुछ दिनों बाद रोहिणी के सेक्टर 32 में एक खुले मैनहोल में गिरने से एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। रोहिणी में हुए इस हादसे को लेकर चश्मदीद ने चौंकने वाला खुलासा किया है। इस मैनहोल का रखरखाव भी डीडीए द्वारा किया जाता है।
दिल्ली के जनकपुरी में गड्ढे में गिरने से 25 साल के युवक की मौत के कुछ दिनों बाद रोहिणी के सेक्टर 32 में एक खुले मैनहोल में गिरने से एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। रोहिणी में हुए इस हादसे को लेकर चश्मदीद ने चौंकने वाला खुलासा किया है। इस मैनहोल का रखरखाव भी डीडीए द्वारा किया जाता है।
रोहिणी हादसे में मारे गए व्यक्ति की पहचान बिहार के समस्तीपुर जिले के दिहाड़ी मजदूर बिरजू कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि कुमार घटनास्थल के पास ही रहता था। यह घटना जनकपुरी हत्याकांड को लेकर मचे आक्रोश के ठीक बाद हुई है, जिसके चलते दिल्ली सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से 8 सूत्रीय सुरक्षा ढांचा घोषित किया था।
प्रत्यक्षदर्शी का दावा है कि व्यक्ति सोमवार से गड्ढे में पड़ा था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने पुलिस को सूचित करने के लिए 112 पर कॉल किया था और दावा किया कि मजदूर सोमवार से गड्ढे में पड़ा था। उसने आरोप लगाया कि पुलिस उसके कॉल करने के बाद ही मौके पर पहुंची, जबकि उस व्यक्ति के दोस्तों ने पहले ही अधिकारियों को सूचना दे दी थी।
तेजपाल यादव ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि मुझे पता चला कि एक आदमी गड्ढे में गिर गया है, लेकिन पुलिस ने किसी भी विभाग को सूचना नहीं दी थी। यहां पहुंचने के बाद मैंने 112 डायल किया। इसके बाद पूरा विभाग मौके पर पहुंचा। हालांकि, जब मैं पहली बार यहां आया तो पहले से ही कई अधिकारी मौजूद थे। वह आदमी कल से गड्ढे में पड़ा हुआ था। उसके दोस्तों ने आज शाम 4 बजे पुलिस प्रशासन को सूचना दी, लेकिन कार्रवाई मेरे फोन करने के बाद ही हुई। उन्होंने बताया कि उनके फोन करने के बाद ही अधिकारी मौके पर पहुंचे और जल्दबाजी में खुली नालियों को ढक दिया।
उन्होंने आगे कहा कि यह घटना कल हुई। यहां आने के बाद हमने देखा कि डीडीए के अधिकारी आ चुके थे और अपने साथ मैनहोल कवर भी लाए थे। वे जल्दबाजी में खुली नालियों को ढक रहे थे। उस समय केवल एक गश्ती अधिकारी मौजूद था और निजी टैंकर भी थे। पूछने पर उन्होंने बताया कि विभाग के लोग अभी रास्ते में है, जबकि उन्हें शाम 4 बजे ही फोन कर दिया गया था। मैंने 112 डायल किया और 15 मिनट के भीतर पूरा विभाग आ गया। शव रात करीब 8 से 8:30 बजे बरामद किया गया।
पुलिस ने बताया कि मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे बेगमपुर थाने में एक व्यक्ति के नाले में गिरने की सूचना मिली। दिल्ली पुलिस और दिल्ली अग्निशमन सेवा की टीमें मौके पर भेजी गईं। कुमार को रात करीब 9 बजे नाले से बाहर निकाला गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रोहिणी के डीसीपी राजीव रंजन ने एचटी को बताया कि हमें बेगमपुर के सेक्टर 32 स्थित महाशक्ति काली मंदिर के पास एक व्यक्ति के नाले में गिरने की सूचना मिली। लगभग छह घंटे की मशक्कत के बाद पीड़ित को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि घटना के समय कुमार के साथ उनका एक दोस्त भी था। पूछताछ के दौरान बुधन दास नामक दोस्त ने जांचकर्ताओं को बताया कि सोमवार को वह और कुमार दिन भर शराब पी रहे थे। एक अधिकारी ने बताया कि दास ने उन्हें बताया कि मंगलवार दोपहर को होश आने के बाद ही उन्हें पता चला कि कुमार नाले में गिर गया था।
पुलिस ने बताया कि सीवर लगभग 14 फीट गहरा है और इसका रखरखाव डीडीए द्वारा किया जाता है। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि उस समय मैनहोल खुला हुआ था, हालांकि जांचकर्ता अभी जांच कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। लापरवाही से मौत का कारण बनने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
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