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नमो भारत के दो कॉरिडोर से आएगी रफ्तार, सड़कों से हटेंगी 2 लाख गाड़ियां; मिनटों में होगा सफर

नमो भारत के दो कॉरिडोर से आएगी रफ्तार, सड़कों से हटेंगी 2 लाख गाड़ियां; मिनटों में होगा सफर

संक्षेप:

दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने के लिए नमो भारत RRTS के दो नए कॉरिडोर (करनाल और बावल) को मंजूरी दी गई है, जिससे दिल्ली से करनाल और बावल का सफर महज एक घंटे के आसपास सिमट जाएगा।

Jan 16, 2026 01:01 pm ISTAnubhav Shakya लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक की जाम और प्रदूषण की समस्या से तंग आ चुके लाखों लोग अब राहत की सांस ले सकते हैं। नमो भारत RRTS प्रोजेक्ट के तहत दो नई हाई-स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर दिल्ली को हरियाणा के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाली हैं, जो सड़कों से करीब दो लाख गाड़ियां हटा देंगी और सफर को सुपरफास्ट बना देंगी।

दिल्ली से करनाल सिर्फ 90 मिनट में, मुरथल पहुंचेंगे मात्र 30 मिनट में

नमो भारत का पहला कॉरिडोर दिल्ली-पानीपत-करनाल है। यह कॉरिडोर सराय काले खां से शुरू होकर करनाल के नए आईएसबीटी तक जाएगा। कुल लंबाई 136 किमी है, जिसमें दिल्ली में 36 किमी और हरियाणा में 100 किमी शामिल हैं। रूट पर 17 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इसमें दिल्ली में 6 और हरियाणा में 11 स्टेशन होंगे। प्रमुख स्टेशन सोनीपत, कुंडली, पानीपत, IOCL रिफाइनरी और करनाल जैसे इंडस्ट्रियल और एजुकेशन हब से गुजरेंगे।

टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कॉरिडोर पर ट्रेनें औसतन 90 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी। इससे दिल्ली से करनाल का सफर सिर्फ 90 मिनट में, कश्मीरी गेट से मुरथल 30 मिनट में और पानीपत तक एक घंटे में पूरा हो सकेगा। दो डिपो मुरथल और गंजबार ऑपरेशन के लिए बनेंगे। रोजाना लाखों यात्री इस रूट पर यात्रा करते हैं, जहां जाम और प्रदूषण बड़ी समस्या है।

Rapid Rail

दिल्ली-गुरुग्राम-बावल कॉरिडोर

यह कॉरिडोर लगभग 92 किमी लंबा होगा, जिसमें दिल्ली में करीब 22 किमी और हरियाणा में 71 किमी शामिल हैं। रूट गुरुग्राम, मानेसर, MBIR और बावल जैसे शहरी-औद्योगिक क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। दिल्ली एयरपोर्ट को RRTS से जोड़ने से एनसीआर की उत्पादकता बढ़ेगी। दिल्ली से बावल का सफर महज एक घंटे में पूरा होगा। यह कॉरिडोर यात्रियों को तेज और आरामदायक विकल्प देगा, जिससे सड़क यात्रा से शिफ्ट होगा। इससे ट्रैफिक कम होगा, समय बचेगा और सड़कों पर कम नुकसान होगा।

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर से मिली सफलता

वर्तमान में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर (82 किमी) का 55 किमी हिस्सा चल रहा है। पूरी लाइन तैयार होने पर इस रूट पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग 37% से बढ़कर 63% हो जाएगा। इससे एक लाख से ज्यादा निजी वाहन सड़क से हटेंगे और सालाना 2.5 लाख टन CO2 उत्सर्जन कम होगा।

एनसीआरटीसी के अधिकारी बताते हैं कि स्टील-टू-स्टील संपर्क की वजह से नमो भारत ट्रेनें सड़क वाहनों की तुलना में सिर्फ 1/5 ईंधन खर्च करती हैं। यह एनसीआर में पर्यावरण-अनुकूल ट्रांसपोर्ट का बेहतरीन विकल्प है। अधिकांश स्टेशन मेट्रो और रेलवे से जुड़े होंगे, जिससे कनेक्टिविटी आसान रहेगी।

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
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