काम की बात: दिल्ली में निर्माण श्रमिकों की मदद को नई पहल, 'पासपोर्ट सेवा केंद्र' की तर्ज पर बनेंगे KSK सेंटर
Karmik Sewa Kendra : दिल्ली सरकार पासपोर्ट सेवा केंद्र की तर्ज पर पूरे शहर में कार्मिक सेवा केंद्र (KSK) स्थापित करेगी, ताकि निर्माण श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन किया जा सके और उन्हें विभिन्न सेवाएं व कल्याणकारी योजनाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

दिल्ली में काम करने वाले निर्माण श्रमिकों के लिए गुड न्यूज है। दिल्ली सरकार पूरे शहर में 'पासपोर्ट सेवा केंद्र' की तर्ज पर 'कार्मिक सेवा केंद्र' स्थापित करेगी। इनका काम निर्माण श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन करना और विभिन्न सेवाओं व कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना होगा।
अधिकारियों ने रविवार को बताया कि दिल्ली भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड (DBOCWWB) ने शहर में प्रवासी और स्थानीय श्रमिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 13 स्थायी और 13 मोबाइल KSKs को डिजाइन और विकसित करने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
उन्होंने बताया कि इस पहल का मकसद करीब 30 लाख लोगों को सहायता प्रदान करना है, विशेष रूप से उन लोगों को जो प्रवासी श्रमिकों और असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत लोगों जैसे कमजोर वर्गों से संबंधित हैं।
दिल्ली के सभी 13 जिलों में बनेंगे 39 'लेबर चौक'
उन्होंने बताया कि चुनी गई एजेंसी दिल्ली के सभी 13 जिलों में 39 'लेबर चौक' भी विकसित करेगी। प्रत्येक जिले में तीन-तीन लेबर चौक बनाए जाएंगे ताकि पूरी राजधानी में कल्याण बोर्ड की विभिन्न योजनाओं को सुगम बनाकर सुचारू रूप से लागू किया जा सके।
एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, कार्मिक सेवा केंद्रों की स्थापना की जरूरत इसलिए महसूस की गई, क्योंकि श्रमिकों को अपने काम से जुड़ी जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। इसमें आगे कहा गया है, "पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) के मॉडल पर आधारित सेवा केंद्रों का एक नेटवर्क बनाकर इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य इन समस्याओं को काफी हद तक कम करना है।"
पात्र श्रमिकों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा
दिल्ली सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि 'कार्मिक सेवा केंद्र' स्थापित करने की योजना, 'बेहद सफल' रहे 'पासपोर्ट सेवा केंद्र' (PSK) मॉडल से प्रेरित है, जिसने देश में पासपोर्ट सेवाओं को पूरी तरह बदल दिया था। उन्होंने कहा कि 'कार्मिक सेवा केंद्र' में समय-सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन करने के साथ ही उन पात्र श्रमिकों का उचित रिकॉर्ड बनाकर रखा जाएगा जिन्हें कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाना है।
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मकसद श्रमिकों से संबंधित सेवाओं को अधिक सुव्यवस्थित, कुशल और यूजर्स फ्रेंडली बनाकर वेटिंग टाइम को कम करना, सेवा वितरण मानकों में सुधार करना और श्रमिकों की संतुष्टि के उच्च स्तर को सुनिश्चित करना है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत 'लेबर चौक' की स्थापना से श्रमिकों को निर्धारित स्थानों पर रोजगार के अवसर, बुनियादी सुविधाएं और कल्याणकारी सेवाओं तक पहुंचने के लिए एक व्यवस्थित और संगठित मंच मिल सकेगा।
AI पर आधारित होंगे डिजिटल सेवा केंद्र
दस्तावेजों के अनुसार, कार्मिक सेवा केंद्र टेक्नोलॉजी से लैस होंगे और उनमें पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित डिजिटल सेवा केंद्र होंगे, जिनमें इंसानी दखल बहुत कम होगा, ताकि यह प्रक्रिया अपने आप संचालित हो सके। इन केंद्रों में श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन के समय से लेकर उनकी सदस्यता खत्म होने तक उनकी सभी जानकारी जिनमें मेडिकल जांच, किट या बोर्ड द्वारा शुरू की गई अन्य कल्याणकारी योजनाएं और DBT लाभ शामिल हैं पर नजर रखी जाएगी। दस्तावेज में कहा गया है कि श्रमिकों की सुविधा के लिए सेवा केंद्रों पर सेल्फ-हेल्प कियोस्क भी लगाए जाएंगे।
कार्मिक सेवा केंद्र श्रमिकों से जुड़े कामों को आसान बनाने और सेवाओं तक उनकी पहुंच को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इन केंद्रों पर दी जाने वाली सेवाओं में राज्य और राष्ट्रीय डेटाबेस में श्रमिकों का औपचारिक रजिस्ट्रने, साथ ही उनके लेबर कार्ड का नवीनीकरण शामिल है।
एक अधिकारी ने बताया कि मोबाइल कार्मिक सेवा केंद्र (KSK) दिल्ली के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाएंगे, जबकि स्थायी KSK शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेंगे।


