
दिल्ली में यमुना साफ करने की मुहिम तेज, बारामुला नाले को लेकर बनाया खास प्लान
दिल्ली जल बोर्ड ने एनजीटी को बताया कि यमुना को प्रदूषित करने वाले बारापुला नाले की 10 उप-नालियों को सफलतापूर्वक ट्रैप कर लिया गया है और 34 नए एसटीपी के जरिए सीवेज शोधन का काम तेज कर दिया गया है।
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने यमुना नदी को प्रदूषित करने वाले बारापुला नाले की सफाई में अच्छी प्रगति की है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को सौंपी गई हालिया रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड ने बताया कि प्रदूषण रोकने के ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
43 छोटी नालियों में से 10 पर काबू
बारापुला नाले में सीवेज डालने वाली 43 छोटी नालियों की पहचान पिछले साल हुई थी। इनमें से 10 नालियों को जल बोर्ड ने सफलतापूर्वक ट्रैप कर लिया है। अब इनका गंदा पानी सीधे नाले में नहीं गिरता, बल्कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में पहुंचकर साफ होता है।
बाकी 25 नालियों को ट्रैप करने का काम चल रहा है। इनका लक्ष्य 30 जून 2026 तक पूरा करने का है। कुछ जगहों पर निर्माण जारी है, जबकि अन्य में प्रशासनिक मंजूरियां ली जा रही हैं। झुग्गी क्लस्टर, जंगल की जमीन या विभागीय मुद्दों पर जल बोर्ड संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर रहा है।
34 नए छोटे STP का निर्माण
दिल्ली जल बोर्ड 34 नए डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTP) बना रहा है। ये स्थानीय स्तर पर सीवेज को साफ करेंगे। इनमें से 13 प्लांट 2025 के अंत तक चालू हो जाएंगे, जबकि बाकी 2028 तक तैयार होंगे। 33 प्लांटों के टेंडर पहले ही जारी हो चुके हैं। ताजपुर पहाड़ी, फतेहपुरी बेरी और घिटोरनी में तीन प्लांट खासतौर पर अनधिकृत कॉलोनियों के सीवेज के लिए बनाए जा रहे हैं।
NGT की निगरानी में चुनौतियां
NGT कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है, जिसमें निजामुद्दीन वेस्ट के निवासियों ने मानसून में जलभराव और नालियों की समस्या उठाई है। ट्रैब्यूनल ने कहा है कि नालियों में सीवेज बहना बंद होना चाहिए। ट्रैपिंग अस्थायी उपाय है, क्योंकि इससे बारिश के पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है। जल बोर्ड अब 'स्रोत पर ट्रैपिंग' के सिद्धांत पर काम कर रहा है। दिल्ली के 15 बड़े नालों को पहले ही इस तरह ट्रैप किया जा चुका है।





