
सावधान! दिल्ली में घर के अंदर भी सुरक्षित नहीं आप, ICU और क्लासरूम की हवा भी जहरीली
एक नई रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली का जानलेवा प्रदूषण अब घरों, स्कूलों और अस्पतालों के भीतर भी 8 गुना अधिक पाया गया है, जिससे बचाव के लिए केवल एयर प्यूरीफायर ही एकमात्र प्रभावी उपाय साबित हो रहा है।
अगर आप भी यही सोचते हैं कि बाहर प्रदूषण है तो घर की खिड़की-दरवाजे बंद करके आप सुरक्षित हैं, तो हिंदुस्तान टाइम्स की एक नई रिपोर्ट आपकी नींद उड़ा सकती है। एक हफ्ते तक चली स्टडी में यह साबित हो गया है कि दिल्ली का जहरीला धुआं अब दीवारों के आर-पार हो चुका है। आपका बेडरूम हो या अस्पताल का ICU, हवा हर जगह जहरीली हो चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि बाहर की जहरीली हवा अंदर घुसकर बच्चों, मरीजों और आम लोगों को बराबर नुकसान पहुंचा रही है।
भ्रम टूटा: बंद दरवाजा काफी नहीं!
दिल्लीवाले सोचते हैं कि घर का दरवाजा बंद कर लें तो सुरक्षित। लेकिन ये भ्रम अब चकनाचूर हो गया। 14 से 20 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में की गई जांच में पाया गया कि घर, स्कूल और अस्पतालों के अंदर भी प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से 7 से 8 गुना ज्यादा है। बाहर की प्रदूषित हवा वेंटिलेशन, खिड़कियों, दरवाजों और बिल्डिंग की छोटी-छोटी दरारों से अंदर घुस रही है। बिल्डिंग्स ऐसी एक्सट्रीम प्रदूषण झेलने के लिए बनी ही नहीं हैं।
स्कूल में क्लासरूम भी जहरीले धुंध से भरे
रोहिणी के एक स्कूल में क्लासरूम के अंदर PM2.5 का स्तर 432 तक पहुंच गया। यानी बच्चे क्लास में बैठकर भी जहर ही सांस में ले रहे हैं। वहीं स्कूल के प्लेग्राउंड और पार्किंग में बाहर का PM2.5 246 से 502 तक पहुंचा।
अस्पताल भी फेल
देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स (AIIMS) के कैंसर और मैटेनरी वार्ड में प्रदूषण का स्तर 200 से 300 के बीच रहा। भीड़भाड़ वाले OPD में तो यह 431 तक पहुंच गया। यानी पूरे अस्पताल में हवा जहरीली ही थी।

दीवारों से रिस रहा है प्रदूषण
सोसाइटी फॉर इंडोर एनवायरनमेंट के डॉ. राकेश कुमार बताते हैं कि बाहर की जहरीली हवा खिड़कियों की दरारों, दरवाजों और वेंटिलेशन सिस्टम के जरिए अंदर घुस रही है। कई बार अस्पतालों के एसी (HVAC) सिस्टम के फिल्टर सालों तक साफ नहीं होते, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं।
बचने का सिर्फ एक ही है तरीका?
इस पूरी जांच में सिर्फ एक जगह ऐसी मिली जहां हवा सांस लेने लायक थी, वो था विकासपुरी का एक घर, जहां एयर प्यूरीफायर लगातार चल रहा था। वहां PM2.5 का स्तर गिरकर 18 से 40 के बीच आ गया, जो सुरक्षित माना जाता है। इसका मतलब साफ है कि बिना प्यूरीफायर के अब 'बंद कमरा' भी आपको नहीं बचा सकता।
एक्सपर्ट बता रहे हेल्थ इमरजेंसी
वारियर मॉम्स की भवरिन कंधारी ने कहा, 'हम सोचते थे दरवाजा बंद करने से बच्चे सुरक्षित रहेंगे, लेकिन यह सच नहीं है। हाइब्रिड स्कूलिंग भी कोई हल नहीं।" वहीं एयर पॉल्यूशन एक्सपर्ट सुनील दहिया ने बताया, 'अस्पतालों में मरीज सबसे ज्यादा कमजोर होते हैं, लेकिन वहां भी कोई सुरक्षा नहीं। असली समाधान बाहर की हवा साफ करना है, जो दिल्ली में नहीं हो रहा।'





