Hindi Newsएनसीआर Newsdelhi indoor air pollution study house school hospital aiims toxic pm2 report
सावधान! दिल्ली में घर के अंदर भी सुरक्षित नहीं आप, ICU और क्लासरूम की हवा भी जहरीली

सावधान! दिल्ली में घर के अंदर भी सुरक्षित नहीं आप, ICU और क्लासरूम की हवा भी जहरीली

संक्षेप:

एक नई रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली का जानलेवा प्रदूषण अब घरों, स्कूलों और अस्पतालों के भीतर भी 8 गुना अधिक पाया गया है, जिससे बचाव के लिए केवल एयर प्यूरीफायर ही एकमात्र प्रभावी उपाय साबित हो रहा है।

Jan 21, 2026 09:29 am ISTAnubhav Shakya नई दिल्ली, हिंदुस्तान टाइम्स
share Share
Follow Us on

अगर आप भी यही सोचते हैं कि बाहर प्रदूषण है तो घर की खिड़की-दरवाजे बंद करके आप सुरक्षित हैं, तो हिंदुस्तान टाइम्स की एक नई रिपोर्ट आपकी नींद उड़ा सकती है। एक हफ्ते तक चली स्टडी में यह साबित हो गया है कि दिल्ली का जहरीला धुआं अब दीवारों के आर-पार हो चुका है। आपका बेडरूम हो या अस्पताल का ICU, हवा हर जगह जहरीली हो चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि बाहर की जहरीली हवा अंदर घुसकर बच्चों, मरीजों और आम लोगों को बराबर नुकसान पहुंचा रही है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

भ्रम टूटा: बंद दरवाजा काफी नहीं!

दिल्लीवाले सोचते हैं कि घर का दरवाजा बंद कर लें तो सुरक्षित। लेकिन ये भ्रम अब चकनाचूर हो गया। 14 से 20 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में की गई जांच में पाया गया कि घर, स्कूल और अस्पतालों के अंदर भी प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से 7 से 8 गुना ज्यादा है। बाहर की प्रदूषित हवा वेंटिलेशन, खिड़कियों, दरवाजों और बिल्डिंग की छोटी-छोटी दरारों से अंदर घुस रही है। बिल्डिंग्स ऐसी एक्सट्रीम प्रदूषण झेलने के लिए बनी ही नहीं हैं।

स्कूल में क्लासरूम भी जहरीले धुंध से भरे

रोहिणी के एक स्कूल में क्लासरूम के अंदर PM2.5 का स्तर 432 तक पहुंच गया। यानी बच्चे क्लास में बैठकर भी जहर ही सांस में ले रहे हैं। वहीं स्कूल के प्लेग्राउंड और पार्किंग में बाहर का PM2.5 246 से 502 तक पहुंचा।

ये भी पढ़ें:दिल्ली में 1470 करोड़ से बनेगा 6-लेन एलिवेटेड रोड, इन इलाकों को होगा फायदा
ये भी पढ़ें:ऊपर मेट्रो, नीचे गाड़ियां; साउथ दिल्ली को रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा तोहफा
ये भी पढ़ें:दिल्ली में बदला मौसम का मिजाज, तेज धूप ने चढ़ाया पारा; दो दिन में होगी बारिश

अस्पताल भी फेल

देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स (AIIMS) के कैंसर और मैटेनरी वार्ड में प्रदूषण का स्तर 200 से 300 के बीच रहा। भीड़भाड़ वाले OPD में तो यह 431 तक पहुंच गया। यानी पूरे अस्पताल में हवा जहरीली ही थी।

प्रदूषण

दीवारों से रिस रहा है प्रदूषण

सोसाइटी फॉर इंडोर एनवायरनमेंट के डॉ. राकेश कुमार बताते हैं कि बाहर की जहरीली हवा खिड़कियों की दरारों, दरवाजों और वेंटिलेशन सिस्टम के जरिए अंदर घुस रही है। कई बार अस्पतालों के एसी (HVAC) सिस्टम के फिल्टर सालों तक साफ नहीं होते, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं।

बचने का सिर्फ एक ही है तरीका?

इस पूरी जांच में सिर्फ एक जगह ऐसी मिली जहां हवा सांस लेने लायक थी, वो था विकासपुरी का एक घर, जहां एयर प्यूरीफायर लगातार चल रहा था। वहां PM2.5 का स्तर गिरकर 18 से 40 के बीच आ गया, जो सुरक्षित माना जाता है। इसका मतलब साफ है कि बिना प्यूरीफायर के अब 'बंद कमरा' भी आपको नहीं बचा सकता।

एक्सपर्ट बता रहे हेल्थ इमरजेंसी

वारियर मॉम्स की भवरिन कंधारी ने कहा, 'हम सोचते थे दरवाजा बंद करने से बच्चे सुरक्षित रहेंगे, लेकिन यह सच नहीं है। हाइब्रिड स्कूलिंग भी कोई हल नहीं।" वहीं एयर पॉल्यूशन एक्सपर्ट सुनील दहिया ने बताया, 'अस्पतालों में मरीज सबसे ज्यादा कमजोर होते हैं, लेकिन वहां भी कोई सुरक्षा नहीं। असली समाधान बाहर की हवा साफ करना है, जो दिल्ली में नहीं हो रहा।'

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज , धर्म ज्योतिष , एजुकेशन न्यूज़ , राशिफल और पंचांग पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।