सत्य की जीत हुई; जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के CBI अर्जी ट्रांसफर करने पर बोले केजरीवाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को आबकारी नीति मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया ताकि इसे दूसरी बेंच को ट्रांसफर किया जा सके। अरविंद केजरीवाल ने इसे सत्य की जीत करार दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को आबकारी नीति मामले को चीफ जस्टिस के पास दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने के लिए भेज दिया। यही नहीं जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज एवं अन्य के खिलाफ आबकारी नीति मामले के संबंध में उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट करने के लिए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की। मामले को दूसरी बेंच के लिए भेजे जाने के फैसले पर अरविंद केजरीवाल का बयान सामने आया है। उन्होंने इसे सत्य की जीत करार दिया है।
फिर जीता गांधी जी का सत्याग्रह- केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने बगैर संदर्भ के एक्स पर किए अपने एक पोस्ट में कहा- सत्य की विजय हुई है।गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई है। बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत ने गुरुवार को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज एवं अन्य के खिलाफ आबकारी नीति मामले के संबंध में उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित अपमानजनक पोस्ट करने के लिए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की।
सोशल मीडिया पर जताई आपत्ति
खुली अदालत में सुनाए गए एक विस्तृत आदेश में जस्टिस शर्मा ने अवमानना के आरोपियों की ओर से सोशल मीडिया पर किए गए कई पोस्टों पर आपत्ति जताई। इन पोस्टों में उन पर ‘राजनीतिक निष्ठा’ का आरोप लगाया गया था। यही नहीं इन पोस्टों में वाराणसी के एक शैक्षणिक संस्थान में दिए गए जस्टिस शर्मा के भाषण के एडिटेड वीडियो को पोस्ट करके कथित तौर पर उन्हें निशाना बनाया गया था।
मामले से खुद को अलग करने से इनकार
जस्टिस शर्मा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने मेरे द्वारा मामले से खुद को अलग करने से इनकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने और कानूनी उपायों का सहारा लेने के बजाय मेरी प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोशिश की। अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में अदालत के अधिकार को कम करने के जानबूझकर किए गए प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
सोची-समझी साजिश का हिस्सा थे केजरीवाल के अभियान
जस्टिस शर्मा ने कहा कि अदालत के खिलाफ दिए गए बयान, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक कैंपेन एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थे। इनका मकसद न्यायपालिका की साख को चोट पहुंचाना और न्याय प्रशासन में रुकावट डालना था। सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे संगठित कैंपेन के जरिए न्यायपालिका को डराया नहीं जा सकता है।
मामले से अलग नहीं किया, इसलिए किया ट्रांसफर
न्यायमूर्ति शर्मा ने स्पष्ट किया कि वह स्वयं को इस मामले से अलग नहीं कर रही हैं वरन अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के कारण मामले को दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर रही हैं। आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर अब दूसरी पीठ सुनवाई करेगी। जस्टिस शर्मा ने कहा कि अब कोर्ट और जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू हो चुकी है इसलिए न्यायिक मर्यादा के हिसाब से जरूरी है कि आबकारी नीति मामले की सुनवाई कोई दूसरी बेंच करे।
(पीटीआई, एएनआई के इनपुट के साथ)
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