बिना अनुमति पेड़ों की छंटाई नहीं, दिल्ली सरकार की SOP पर रोक; क्या बोला हाईकोर्ट?
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार की उस एसओपी पर रोक लगा दी है, जिसमें कम घेराव वाली पेड़ों की टहनियों को बिना अनुमति छांटने की छूट दी गई थी। अदालत ने इसे अपने पुराने फैसले के खिलाफ माना है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार की उस मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर रोक लगा दी है, जिसमें 15.7 सेंटीमीटर से कम घेराव वाली पेड़ों की टहनियों को बिना अनुमति छांटने की छूट दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह नियम उनके 2023 के पुराने फैसले के खिलाफ है, जिसमें कहा गया था कि पेड़ों की छंटाई के लिए ट्री ऑफिसर की इजाजत अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि सरकार अधिसूचना के जरिए अदालत के आदेश को दरकिनार करने की कोशिश कर रही है जो स्वीकार्य नहीं है। फिलहाल कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने दिल्ली सरकार की उस मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अमल पर रोक लगा दी है, जिसमें 15.7 सेंटीमीटर से कम घेराव वाली शाखाओं की सामान्य देखभाल व हल्की छंटाई बिना ट्री अधिकारी की पूर्व अनुमति के करने की अनुमति दी गई थी। पीठ ने कहा कि यह एसओपी अदालत के पहले दिए गए बाध्यकारी फैसले के विपरीत है।
पीठ ने कहा कि 2 मई 2025 को दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 33 के तहत जारी अधिसूचना के जरिए सरकार वर्ष 2023 में दिए गए अदालत के फैसले को निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है। उस फैसले में स्पष्ट कहा गया था कि कानून के तहत ऐसी छूट नहीं दी जा सकती। मामले की सुनवाई भवरीन कंधारी द्वारा दायर अवमानना याचिका पर हो रही है।
एसओपी में क्या खास?
एसओपी में कहा गया कि जिन पेड़ की शाखाओं का घेराव 15.7 सेंटीमीटर से कम है। उनकी सामान्य देखभाल एवं हल्की छंटाई के लिए ट्री अधिकारी की अनुमति जरूरी नहीं होगी। इसके अलावा यदि किसी पेड़ से जान-माल या यातायात को खतरा हो तो सरकारी एजेंसियों को सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी घेराव वाली शाखाओं की छंटाई करने की अनुमति दी गई थी, बशर्ते यह कार्य वरिष्ठ बागवानी अधिकारियों की निगरानी में हो।
पिछले फैसले के उलट है एसओपी
पीठ ने एसओपी का अवलोकन करते हुए कहा कि यह 29 मई 2023 के फैसले के सीधे विपरीत है, जो अंतिम रूप ले चुका है और सरकार पर बाध्यकारी है। वर्ष 2023 के फैसले में अदालत की समन्वय पीठ ने दिल्ली सरकार की उन दिशानिर्देशों को रद्द किया, जिनमें 15.7 सेंटीमीटर तक की शाखाओं की नियमित छंटाई बिना पूर्व अनुमति के करने की अनुमति दी गई थी।
जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते की मोहलत
उस फैसले में कहा गया था कि छंटाई की अनुमति केवल दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम की धारा 9 के तहत ही दी जा सकती है। पीठ ने कहा कि इस अधिसूचना के जरिए प्रतिवादी 29 मई 2023 के फैसले को पलटने का प्रयास कर रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। इसी के साथ पीठ ने अगली सुनवाई तक एसओपी के अमल पर रोक लगा दी है। पीठ ने प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की है।
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