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कैंटोनमेंट बोर्डों के चुनाव नहीं कराने पर केंद्र पर बरसा दिल्ली हाईकोर्ट, क्या कहा?

कैंटोनमेंट बोर्डों के चुनाव नहीं कराने पर केंद्र पर बरसा दिल्ली हाईकोर्ट, क्या कहा?

संक्षेप:

दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 साल से अधिक समय से देश भर में कैंटोनमेंट बोर्डों के चुनाव नहीं करा पाने के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। साथ ही तल्ख टिप्पणियां भी की। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

Dec 01, 2025 11:08 pm ISTKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि केंद्र 5 साल से ज्यादा समय से देश भर में कैंटोनमेंट बोर्डों के चुनाव नहीं करा पाने और बिना चुने अधिकारियों से बॉडीज को चलाने के लिए बार-बार नोटिफिकेशन का इस्तेमाल कर रही है। देश में 60 से ज्यादा कैंटोनमेंट बोर्ड हैं। ये बोर्ड कैंटोनमेंट के तौर पर तय इलाकों के निगम प्रशासन की तरह व्यवस्था देखते हैं। इन बोर्ड के सदस्यों को चुनने के लिए पिछले चुनाव जनवरी 2015 में हुए थे। उन सदस्यों का कार्यकाल 2020 में खत्म हो गया था। लेकिन तब से कैंटोनमेंट बोर्ड का चुनाव नहीं हुआ है।

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मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि हम एक लोकतांत्रिक समाज में हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक तरीके से चुने संस्थानों को लोगों पर राज करना चाहिए। ऐसा व्यवहार सत्ता का गलत इस्तेमाल हो सकता है। कैंटोनमेंट एक्ट 2006 की धारा 12 चुने हुए सदस्यों के साथ इन बोर्ड के गठन का नियम बताता है। लेकिन सरकार धारा 13 के तहत संविधान में बदलाव करने के लिए अधिसूचना जारी कर रही है और चुनाव नहीं करा रही है।

पीठ ने कहा कि धारा 13 के तहत कैंटोनमेंट बोर्ड के गठन में बदलाव करने की शक्ति का इस्तेमाल केवल दो स्थितियों में किया जा सकता है। एक तो मिलिट्री ऑपरेशन की वजह से या कैंटोनमेंट के प्रशासनिक कार्य की वजह से। इसलिए पीठ ने केन्द्र सरकार के साथ-साथ डायरेक्टर जनरल डिफेंस एस्टेट्स (डीजीडीई) को नोटिस जारी किया है।

पीठ ने डायरेक्टर जनरल डिफेंस एस्टेट्स को यह बताते हुए अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया कि जब कानून कहता है कि बोर्ड को लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए बोर्ड के जरिए काम करना चाहिए तो धारा 13 के तहत अधिसूचना को बार-बार जारी करने की इजाजत कैसे दी जा सकती है। अब इस याचिका को जनहित याचिका के तौर पर देखा जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को होगी।

पीठ ने उक्त निर्देश दिल्ली और आगरा कैंटोनमेंट के रहने वाले संदीप तंवर और योगेश कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कैंटोनमेंट बोर्ड के चुनाव कराने के निर्देश मांगे गए हैं। अपनी याचिका में तंवर और योगेश कुमार ने दलील दी है कि केंद्र सरकार कैंटोनमेंट बोर्ड के संविधान में बदलाव की आड़ में 10 साल से ज्यादा समय से चुनाव नहीं करा पाई है। इसमें यह भी कहा गया है कि अलग-अलग कैंटोनमेंट बोर्ड में स्थानीय सदस्यों को नामांकित करने में भी काफी देरी हुई है।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh
पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों से केबी उपनाम से पहचान रखने वाले कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। मूलरूप से यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लॉ और साइंस से ग्रेजुएट केबी ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमफिल किया है। वह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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