एक तिहाई सजा काट चुके विचाराधीन कैदियों को देनी चाहिए रिहाई; दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि जिन विचाराधीन कैदियों ने अपनी संभावित अधिकतम सजा का एक-तिहाई या आधा हिस्सा जेल में बिता लिया है, उनको तुरंत रिहा किया जाए। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इन नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जिन विचाराधीन कैदियों ने अपनी संभावित अधिकतम सजा का एक-तिहाई या आधा हिस्सा जेल में काट लिया है उन्हें रिहा किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी जताई। अदालत ने कहा कि पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट भ्रामक थी। अदालत ने जिला न्यायाधीशों और जेल अधिकारियों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है ताकि कैदियों को समय पर कानूनी राहत मिल सके।
दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आदेश देते हुए कहा कि जिन विचाराधीन कैदियों ने संभावित अधिकतम सजा का एक-तिहाई या आधा हिस्सा पूरा कर लिया है, उन्हें राहत दी जानी चाहिए। यह निर्देश धोखाधड़ी एवं प्रतिरूपण के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए दिया।
आदेश की प्रति जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भी भेजा
अदालत ने आदेश की प्रति जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, जेल महानिदेशक, दिल्ली हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति एवं दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश भी दिए हैं। मामले में आरोपी पर खुद की गलत पहचान बताकर शिकायतकर्ता और उसकी बेटी से धोखाधड़ी करने का आरोप था। अभियोजन पक्ष ने व्हाट्सऐप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग एवं बैंक दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को साबित करने की कोशिश की।
दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी
हालांकि अदालत ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पुलिस की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट भ्रामक है क्योंकि उसमें जिन ऑडियो रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया गया, वे वास्तव में सह-आरोपी से संबंधित थीं न कि मौजूदा आरोपी से।
पहले ही एक-तिहाई से अधिक जेल काट चुका है आरोपी
अदालत ने यह भी चिंता जताई कि मामले में नामजद 5 आरोपियों में से केवल 1 को ही गिरफ्तार किया गया जबकि अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। इसे लेकर पीठ ने कहा कि जांच एजेंसी के रवैये पर गंभीर सवाल उठते हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी पहले से ही अधिकतम सजा (7 साल) के एक-तिहाई से अधिक अवधि जेल में बिता चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद ऐसे मामले चिंताजनक
मुकदमे की सुनवाई अभी शुरू भी नहीं हुई है। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई ऐसे आरोपी जो पहली बार अपराध में शामिल हुए हैं, एक तिहाई या उससे अधिक अवधि जेल में बिताने के बाद भी बंद हैं, चिंताजनक है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पीठ ने आरोपी को जमानत दे दी है। साथ ही यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन हो।
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Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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