
उदयपुर के ताज लेक पैलेस होटल से जुड़ा फेक एआई वीडियो हटाएं, क्या बोला दिल्ली हाईकोर्ट?
दिल्ली हाईकोर्ट ने उस फेक एआई वीडियो को हटाने का आदेश दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि उदयपुर स्थित होटल ताज लेक पैलेस के कर्मचारियों ने मेहमानों को जहर दिया था। अदालत ने कहा कि वीडियो की सामग्री झूठी है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एआई जनरेटेड कथित उन फेक वीडियो को हटाने का आदेश दिया है जिसमें दावा किया गया था कि होटल के कर्मचारियों ने मेहमानों को जहर देकर मार दिया था। अदालत ने कहा कि वीडियो की सामग्री प्रथम दृष्टया झूठी प्रतीत होती है। इसने होटल की साख को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की कोर्ट ने कहा कि अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि ऐसा फर्जी वीडियो होटल की प्रतिष्ठा पर सीधा आघात करता है और जनता के सामने होटल की छवि को गलत तरीके से पेश करता है। अदालत ने यह अंतरिम आदेश टाटा समूह की इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड की याचिका पर पारित किया है।
कंपनी ने बताया कि हाल ही में ताज लेक पैलेस को ग्लोबल मिशेलिन कीज सिलेक्शन में तीन मिशेलिन कीज से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार विश्व के सबसे विशिष्ट और अनोखे होटलों को दिया जाता है। लेकिन इसके तुरंत बाद एक इंस्टाग्राम पेज से एक डीपफेक वीडियो जारी किया गया।
वीडियो में झूठा दावा किया गया कि वर्ष 2018 में होटल के एक कर्मचारी ने अमीर मेहमानों को जहर देकर मार दिया और बाद में अधिकारियों ने इसे छिपा दिया। याचिका में यह भी कहा गया कि वीडियो में जहर के रूप में जिस ‘फॉक्सग्लोव’ पौधे का उल्लेख किया गया, वह उदयपुर की जलवायु में उग ही नहीं सकता। वीडियो को 20 हजार से अधिक बार देखा गया और सोशल मीडिया पर कई बार साझा किया गया।
कंपनी ने इसकी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को तय की गई है। अदालत ने वीडियो को हटाने के साथ ही किसी भी सोशल मीडिया पेज या वेबसाइट पर वीडियो या अपमान कारक कोई अन्य सामग्री अपलोड करने से भी रोक दिया है।





