Hindi Newsएनसीआर NewsDelhi High court said sending vulgar messages to woman colleague unbecoming of uniformed officer
एक तो वर्दीधारी उस पर शादीशुदा, ऐसा व्यवहार अनुचित; HC ने SI की सजा बरकरार रखी

एक तो वर्दीधारी उस पर शादीशुदा, ऐसा व्यवहार अनुचित; HC ने SI की सजा बरकरार रखी

संक्षेप:

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक शादीशुदा वर्दीधारी अधिकारी का किसी अन्य महिला के साथ संबंध बनाना और उसे अश्लील मैसेज भेजना अनुचित है। अदालत ने सीआईएसएफ के एक सब इंस्पेक्टर की वेतन कटौती की सजा को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की।

Oct 16, 2025 06:06 pm ISTSubodh Kumar Mishra पीटीआई, नई दिल्ली
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक शादीशुदा वर्दीधारी अधिकारी का किसी अन्य महिला के साथ संबंध बनाना और उसे अश्लील मैसेज भेजना अनुचित है। अदालत ने सीआईएसएफ के एक सब इंस्पेक्टर की वेतन कटौती की सजा को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। सब इंस्पेक्टर पर एक महिला सहकर्मी को अश्लील मैसेज भेजकर और फोन कॉल करके उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप थे।

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जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस विमल कुमार यादव की पीठ ने 22 सितंबर को पारित एक फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता एक यूनिफॉर्म सर्विस का सदस्य होने और पहले से ही शादीशुदा होने के नाते उसे किसी अन्य महिला के साथ संबंध बनाने और अश्लील मैसेज भेजने का कोई अधिकार नहीं था। यह आचरण एक यूनिफॉर्म फोर्स के अधिकारी के लिए अनुचित है।

सजा के खिलाफ अधिकारी की अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कदाचार को देखते हुए सजा उचित थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके साथ बहुत ही कम सजा का इस्तेमाल किया गया। सजा में दो साल के लिए वेतन में कटौती शामिल थी। इस दौरान उसे कोई वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी। इस अवधि के पूरा होने पर इस कटौती के कारण भविष्य में वेतन वृद्धि में भी देरी होगी।

महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बातचीत के दौरान अधिकारी ने कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और बदनीयती से उसके घर में घुस आया। उसकी शिकायत के बाद विभागीय जांच की गई और अधिकारी के खिलाफ आरोप तय किए गए। जांच समिति ने उसे सजा भी दी।

पुनरीक्षण प्राधिकारी ने अधिकारी की दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसके बचाव पक्ष के बयान पर विचार न करने के उसके आरोप का कोई खास विवरण नहीं है। वह अस्पष्ट है और निराधार दलीलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि पुनरीक्षण प्राधिकारी का मानना ​​था कि याचिकाकर्ता विवाहित होने के नाते किसी अन्य महिला के साथ संबंध न बनाने और अश्लील मैसेज न भेजने का नैतिक दायित्व रखता है। कोर्ट ने कहा कि इस न्यायालय को जांच कार्यवाही में कोई कमी नहीं दिखती। यह नहीं कहा जा सकता कि जांच समिति ने बाहरी सामग्री पर विचार किया है या किसी प्रासंगिक सामग्री पर विचार करने से चूक गई है। मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra
सुबोध कुमार मिश्रा लाइव हिन्दुस्तान में दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों की गतिविधियों पर लिखते हैं। 17 साल से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सेवाएं दे रहे सुबोध ने यूं तो डीडी न्यूज से इंटर्नशिप कर मीडिया में प्रवेश किया था, लेकिन पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत दैनिक जागरण, जम्मू से बतौर ट्रेनी 2007 में की। वह कई मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। वह दैनिक जागरण, नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स, अमर उजाला और हिन्दुस्तान अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल का अनुभव रखने वाले सुबोध मूलरूप से बिहार के छपरा जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने स्कूली शिक्षा से लेकर विज्ञान में स्नातक तक की पढ़ाई बिहार से की है। उसके बाद दिल्ली में इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता व मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। सुबोध वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के स्टेट डेस्क पर काम कर रहे हैं। वह राजनीति और अपराध से जुड़ी खबरों में विशेष रूचि रखते हैं। और पढ़ें
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