
एक तो वर्दीधारी उस पर शादीशुदा, ऐसा व्यवहार अनुचित; HC ने SI की सजा बरकरार रखी
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक शादीशुदा वर्दीधारी अधिकारी का किसी अन्य महिला के साथ संबंध बनाना और उसे अश्लील मैसेज भेजना अनुचित है। अदालत ने सीआईएसएफ के एक सब इंस्पेक्टर की वेतन कटौती की सजा को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक शादीशुदा वर्दीधारी अधिकारी का किसी अन्य महिला के साथ संबंध बनाना और उसे अश्लील मैसेज भेजना अनुचित है। अदालत ने सीआईएसएफ के एक सब इंस्पेक्टर की वेतन कटौती की सजा को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। सब इंस्पेक्टर पर एक महिला सहकर्मी को अश्लील मैसेज भेजकर और फोन कॉल करके उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप थे।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस विमल कुमार यादव की पीठ ने 22 सितंबर को पारित एक फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता एक यूनिफॉर्म सर्विस का सदस्य होने और पहले से ही शादीशुदा होने के नाते उसे किसी अन्य महिला के साथ संबंध बनाने और अश्लील मैसेज भेजने का कोई अधिकार नहीं था। यह आचरण एक यूनिफॉर्म फोर्स के अधिकारी के लिए अनुचित है।
सजा के खिलाफ अधिकारी की अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कदाचार को देखते हुए सजा उचित थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके साथ बहुत ही कम सजा का इस्तेमाल किया गया। सजा में दो साल के लिए वेतन में कटौती शामिल थी। इस दौरान उसे कोई वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी। इस अवधि के पूरा होने पर इस कटौती के कारण भविष्य में वेतन वृद्धि में भी देरी होगी।
महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बातचीत के दौरान अधिकारी ने कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और बदनीयती से उसके घर में घुस आया। उसकी शिकायत के बाद विभागीय जांच की गई और अधिकारी के खिलाफ आरोप तय किए गए। जांच समिति ने उसे सजा भी दी।
पुनरीक्षण प्राधिकारी ने अधिकारी की दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसके बचाव पक्ष के बयान पर विचार न करने के उसके आरोप का कोई खास विवरण नहीं है। वह अस्पष्ट है और निराधार दलीलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुनरीक्षण प्राधिकारी का मानना था कि याचिकाकर्ता विवाहित होने के नाते किसी अन्य महिला के साथ संबंध न बनाने और अश्लील मैसेज न भेजने का नैतिक दायित्व रखता है। कोर्ट ने कहा कि इस न्यायालय को जांच कार्यवाही में कोई कमी नहीं दिखती। यह नहीं कहा जा सकता कि जांच समिति ने बाहरी सामग्री पर विचार किया है या किसी प्रासंगिक सामग्री पर विचार करने से चूक गई है। मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया है।





