Hindi Newsएनसीआर NewsDelhi High Court said Airline pilots are workmen under Industrial Disputes Act
वेतन चाहे जो भी हो, एयरलाइन पायलट भी 'श्रमिक' माने जाते हैं; HC ने वेतन संबंधी किंग एयरवेज की अपील खारिज की

वेतन चाहे जो भी हो, एयरलाइन पायलट भी 'श्रमिक' माने जाते हैं; HC ने वेतन संबंधी किंग एयरवेज की अपील खारिज की

संक्षेप:

दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि एयरलाइन पायलट कुशल और तकनीकी कार्य करते हैं। इसलिए वे भी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(एस) के तहत 'श्रमिक' की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं। कोर्ट ने बकाया वेतन को लेकर किंग एयरलाइन द्वारा दायर अपीलें खारिज कर दीं।

Dec 13, 2025 04:31 pm ISTSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि एयरलाइन पायलट कुशल और तकनीकी कार्य करते हैं। इसलिए वे भी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 2(एस) के तहत 'श्रमिक' की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं।

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बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अनिल क्षतरपाल और हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने श्रम न्यायालय के उन आदेशों के खिलाफ किंग एयरवेज द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। एयरवेज ने श्रम न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ अपील की थी जिसमें उसे पायलटों को बकाया वेतन और अन्य देय राशि के भुगतान का निर्देश दिया गया था।

कोर्ट ने 11 दिसंबर को किंग एयरवेज और उसके तीन पायलटों- कैप्टन प्रीतम सिंह, मनजीत सिंह और एनडी कथूरिया के बीच विवादों से संबंधित अपीलों के एक समूह पर फैसला सुनाते हुए यह फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि हम पहले ही यह निष्कर्ष दे चुके हैं कि प्रतिवादी धारा 2(s) में दी गई ‘कर्मचारी’ की परिभाषा के दायरे में आता है, क्योंकि वह कुशल और तकनीकी कार्यों का निर्वाह करता है। इसलिए ऐसे लोगों के वेतन से संबंधित प्रावधानों का सहारा लेने की कोई जरूरत नहीं है।

इन अपीलों में हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश द्वारा दिए गए उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें दिल्ली के कड़कड़डूमा न्यायालय स्थित औद्योगिक न्यायाधिकरण-सह-श्रम न्यायालय के आदेशों को बरकरार रखा गया था। न्यायाधिकरण ने पायलटों के उन दावों को स्वीकार कर लिया था जिनमें उन्हें बकाया वेतन, अतिरिक्त उड़ान घंटों के लिए प्रोत्साहन राशि और एयरलाइन द्वारा रोके गए अन्य भत्तों की मांग की गई थी।

किंग एयरवेज ने तर्क दिया कि पायलट, आईडी अधिनियम की धारा 2(एस) के अर्थ में 'श्रमिक' नहीं थे। उसने दावा किया कि पायलट, विशेष रूप से पायलट-इन-कमांड या कैप्टन के रूप में नामित पायलट, उड़ान संचालन के दौरान चालक दल के सदस्यों पर सुपरविजन करते थे और धारा 2(एस)(iv) के तहत वैधानिक सीमा से काफी अधिक वेतन प्राप्त करते थे।

एयरलाइन ने नियुक्ति पत्रों, वेतन संरचना, सुपरविजन के रूप में किए गए कर्तव्यों, संचालन नियमावली और विमान नियम, 1937 के नियम 141 का हवाला दिया। इसमें पायलट-इन-कमांड द्वारा अन्य चालक दल के सदस्यों की निगरानी और निर्देशन का उल्लेख है।

आगे यह तर्क दिया गया कि बकाया वेतन का भुगतान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के विपरीत था, जिनमें दीपाली गुंडू सुरवासे बनाम क्रांति जूनियर अध्यापक महाविद्यालय का मामला भी शामिल है। इसमें कहा गया है कि बकाया वेतन स्वतः नहीं दिया जाता है।

हालांकि, खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि पायलट उच्च कुशल तकनीकी कर्मी होते हैं जिनका प्राथमिक कार्य विमान उड़ाना है। कोर्ट ने कहा कि यह पहले ही माना जा चुका है कि पायलट उच्च कुशल कर्मी होते हैं जो तकनीकी और परिचालन संबंधी कर्तव्यों का निर्वाह करते हैं। उनका प्राथमिक और सर्वोपरि कार्य विमान उड़ाना है।

विमान नियमों के नियम 141 पर एयरलाइन के भरोसे के संबंध में पीठ ने कहा कि श्रम कानून में सुपरविजन शब्द का प्रयोग निर्णायक नहीं हो सकता। यद्यपि नियम 141 में 'सुपरविजन' शब्द का प्रयोग किया गया है, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित हो कि पायलट-इन-चार्ज द्वारा चालक दल के सदस्यों पर वास्तव में कोई सुपरविजन अधिकार प्रयोग किया जाता है।

कोर्ट ने आगे कहा कि वेतन स्तर श्रमिक स्थिति के निर्धारण के लिए अप्रासंगिक हैं, जब तक कि यह स्थापित न हो जाए कि पायलट केवल सुपरविजन कार्य कर रहा था। पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि वेतन में जो बढ़ोतरी की जा रही है, वह महज़ एक छलावा है। हालांकि, इसका इस्तेमाल यह तय करने के लिए नहीं किया जा सकता कि कोई व्यक्ति पहचान अधिनियम की धारा 2 के तहत ‘कर्मचारी’ है या नहीं। कोर्ट ने एयरलाइन द्वारा दायर अपीलें खारिज कर दीं।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra
सुबोध कुमार मिश्रा लाइव हिन्दुस्तान में दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों की गतिविधियों पर लिखते हैं। 17 साल से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सेवाएं दे रहे सुबोध ने यूं तो डीडी न्यूज से इंटर्नशिप कर मीडिया में प्रवेश किया था, लेकिन पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत दैनिक जागरण, जम्मू से बतौर ट्रेनी 2007 में की। वह कई मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। वह दैनिक जागरण, नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स, अमर उजाला और हिन्दुस्तान अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल का अनुभव रखने वाले सुबोध मूलरूप से बिहार के छपरा जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने स्कूली शिक्षा से लेकर विज्ञान में स्नातक तक की पढ़ाई बिहार से की है। उसके बाद दिल्ली में इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता व मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। सुबोध वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के स्टेट डेस्क पर काम कर रहे हैं। वह राजनीति और अपराध से जुड़ी खबरों में विशेष रूचि रखते हैं। और पढ़ें
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