
दिल्ली के स्कूल ने छात्रों को अंधेरे में रखा, भविष्य बचाने अदालत पहुंचे बच्चे; मिली राहत
दिल्ली हाईकोर्ट ने मान्यता समाप्त होने के बावजूद छात्रों को धोखे में रखने वाले स्कूल पर सख्ती दिखाते हुए सीबीएसई को निर्देश दिया है कि प्रभावित छात्रों को दूसरे स्कूलों में दाखिला देकर उनकी परीक्षा सुनिश्चित कराई जाए।
एक निजी स्कूल की गलती की वजह से अधर में लटके 35 छात्रों ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अपना भविष्य बचाने की गुहार लगाई। छात्रों की अर्जी सुनने के बाद न्यायालय ने इन्हें तत्काल राहत देने के आदेश दिए। असल में मान्यता समाप्त होने के बाद भी इनके स्कूल ने पढ़ाई जारी रखी थी। बोर्ड परीक्षा नजदीक आने के बाद इन्हें स्कूल के मान्यता समाप्त होने की जानकारी मिली।
कोर्ट ने CBSE को दिए निर्देश
उच्च न्यायालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) को निर्देश दिए कि वह इन बच्चों को 11वीं कक्षा की परीक्षा का हिस्सा बनने की इजाजत दे। दरअसल, ये छात्र पश्चिमी दिल्ली स्थित रिचमंड ग्लोबल स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र हैं। केंद्रीय माध्यिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) ने इस स्कूल की मान्यता मार्च 2025 में समाप्त कर दी, लेकिन स्कूल ने इसकी जानकारी छात्रों को नहीं दी। यहां तक की कक्षा नौंवी से 12वीं तक के छात्रों से लगातार फीस वसूली गई। परीक्षा फीस के नाम पर अलग से राशि ली गई। अब जबकि सत्र की अंतिम परीक्षा नजदीक है। दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में छात्रों को सीबीएसई द्वारा मान्यता रद्द करने की जानकारी दी गई। इससे छात्रों का भविष्य खतरे में है।
नजदीक के स्कूलों में दाखिले की अनुमति
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने मंगलवार को इन छात्रों व उनके अभिभावकों समेत अधिवक्ता अशोक अग्रवाल की दलीलें सुनने के बाद सीबीएसई को निर्देश दिया कि इन छात्रों को नजदीक के किसी अन्य स्कूल में दाखिला लेने की अनुमति दें। पीठ ने कहा कि इससे वर्ष 2027 की 12वीं की परीक्षा में इन छात्रों के शामिल होने का रास्ता साफ हो जाएगा। बेशक अपनी पीड़ा लेकर 35 छात्र स्कूल गए हैं, लेकिन इस आदेश का सीधा लाभ 75 छात्रों को होगा। कोर्ट के इस आदेश से छात्रों का भविष्य सुरक्षित होगा।





