रिटायर्ड मेजर विक्रांत जेटली केस: हाईकोर्ट ने यूएई की फर्म को जारी किया पत्र, पूरा मामला
दिल्ली उच्च न्यायालय ने विदेश मंत्रालय को सेवानिवृत्त मेजर विक्रांत जेटली से मिलकर एक अमीराती लॉ फर्म के पक्ष में 'पावर ऑफ अटॉर्नी' पर हस्ताक्षर कराने का आदेश दिया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने विदेश मंत्रालय को सेवानिवृत्त मेजर विक्रांत जेटली से मुलाकात करने और खालिद अल मरी नामक एक अमीराती लॉ फर्म के पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी पर हस्ताक्षर करवाने का निर्देश दिया है।
विक्रांत जेटली की फर्म को जारी किया पत्र
केंद्र सरकार ने विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करने के लिए फर्म को पत्र जारी किया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि वे फर्म से कानूनी सहायता लेने के इच्छुक नहीं हैं, तो वे किसी अन्य फर्म का नाम सुझाएंगे। उच्च न्यायालय ने मंत्रालय को विक्रांत जेटली को उनकी बहन सेलिना जेटली द्वारा दायर याचिका देने का भी निर्देश दिया और उनसे पूछा कि क्या वे अपनी बहन से मिलने के इच्छुक हैं।
चारुल जेटली की दलीलें भी सुनीं
उच्च न्यायालय ने विक्रांत जेटली की पत्नी चारुल जेटली की दलीलें भी सुनीं। उन्होंने कहा कि विक्रांत और उनकी बहन सेलिना के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। विक्रांत जेटली के लिए वकील नियुक्त करने के लिए वे एकमात्र अधिकृत व्यक्ति हैं। अदालत ने उनके वकील को सीलबंद लिफाफे में एक नोट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।


