अगस्ता वेस्टलैंड घोटालाः 7 साल से कैद मिशेल जेम्स को नहीं मिली आजादी, HC ने खारिज कर दी याचिका

Apr 08, 2026 06:21 pm ISTSubodh Kumar Mishra पीटीआई, नई दिल्ली
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अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स अभी जेल में ही रहेगा। रिहाई से जुड़ी उसकी याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस ब्रिटिश नागरिक की याचिका में कोई दम नहीं है। जेम्स को दिसंबर 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटालाः 7 साल से कैद मिशेल जेम्स को नहीं मिली आजादी, HC ने खारिज कर दी याचिका

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स अभी जेल में ही रहेगा। रिहाई से जुड़ी उसकी याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस ब्रिटिश नागरिक की याचिका में कोई दम नहीं है। जेम्स को दिसंबर 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की जेल से रिहाई की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की पीठ ने कहा कि दिसंबर 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किए गए इस ब्रिटिश नागरिक की याचिका में कोई दम नहीं है। अपनी याचिका में जेम्स ने भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि के एक प्रावधान को चुनौती दी। उसने 7 अगस्त 2025 के उस ट्रायल कोर्ट के आदेश को भी चुनौती दी जिसके द्वारा सीआरपीसी की धारा 436ए के तहत जेल से रिहाई के लिए उसकी अर्जी खारिज कर दी गई थी।

1999 में हस्ताक्षरित संधि को चुनौती

जेम्स ने 1999 में हस्ताक्षरित संधि के अनुच्छेद 17 को भी चुनौती दी। यह अनुच्छेद अनुरोध करने वाले राज्य (इस मामले में भारत) को प्रत्यर्पित व्यक्ति पर विशिष्ट अपराध के लिए मुकदमा चलाने की अनुमति देता है, जिसके लिए प्रत्यर्पण किया गया था। साथ ही उससे जुड़े अपराधों के लिए भी मुकदमा चलाने की अनुमति देता है। जेम्स की याचिका में तर्क दिया गया कि प्रत्यर्पित व्यक्ति पर केवल उन्हीं अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है जिनके लिए प्रत्यर्पण हुआ है, न कि उनसे जुड़े अपराधों के लिए। प्रत्यर्पण के बाद जेम्स को सीबीआई और ईडी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था।

जेम्स की दलीलें

जेम्स ने यह भी दलील दी कि उसने 4 दिसंबर 2025 को जेल में सात साल पूरे कर लिए हैं। इसलिए वह उन अपराधों के लिए अधिकतम सजा काट चुका है, जिसके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया था। अब भारत में उसकी निरंतर हिरासत अवैध हो जाती है। जेम्स उन तीन कथित बिचौलियों में से एक हैं, जिसकी इस मामले में जांच चल रही है। अन्य दो बिचौलिए गुइडो हाश्के और कार्लो गेरोसा हैं। इन दोनों को फरवरी 2025 में सीबीआई मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। उसी वर्ष मार्च में हाई कोर्ट ने उन्हें ईडी मामले में जमानत दी थी। हालांकि, जेम्स जमानत की शर्तों को पूरा करने में असमर्थ रहने के कारण अभी भी जेल में है।

लोअर कोर्ट ने जेम्स को सीबीआई मामले में अपनी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए 5 लाख रुपए का निजी मुआवजा और इतनी ही रकम की नकद जमानत देने का निर्देश दिया। ईडी मामले में हाई कोर्ट ने उनसे 5 लाख रुपए का निजी मुआवजा और 10 लाख रुपए की नकद जमानत देने को कहा।

देश छोड़कर न जाए

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जेम्स को पासपोर्ट जमा किए बिना रिहा किया जा सकता है, क्योंकि पासपोर्ट की वैधता समाप्त हो चुकी है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे नया पासपोर्ट तैयार होते ही सीधे लोअर कोर्ट में जमा करा दें। हाई कोर्ट ने देशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि जेम्स देश छोड़कर न जाए।

सीबीआई और ईडी के आरोप

सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में कहा है कि 8 फरवरी 2010 को वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति के लिए 556.26 मिलियन यूरो के सौदे के कारण सरकारी खजाने को लगभग 398.21 मिलियन यूरो (लगभग 2666 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है। ईडी ने जून 2016 में जेम्स के खिलाफ दायर अपने आरोप पत्र में कहा कि उसे अगस्तावेस्टलैंड से 30 मिलियन यूरो (लगभग 225 करोड़ रुपए) मिले थे।

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला 2010 में यूपीए सरकार के दौरान 12 इतालवी हेलीकॉप्टर खरीदने के मामले में हुई डील से जुड़े भ्रष्टाचार को लेकर है। इस घोटाले में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल समेत कई राजनेता और सैन्य अधिकारी आरोपी हैं। मुख्य बिचौलियों में क्रिश्चियन मिशेल जेम्स, गुइडो हैस्के और कार्लो गेरोसा शामिल थे। घोटाले में तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी पर भी आरोप लगे थे।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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