पहलवान सुशील कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, सागर धनखड़ मर्डर केस में जमानत याचिका खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 साल पहले छत्रसाल स्टेडियम में हुई जूनियर पहलवान सागर धनखड़ मर्डर केस में आरोपी पहलवान सुशील कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सुशील को जमानत नहीं दी जा सकती क्योंकि अहम गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी है।

जूनियर पहलवान सागर धनखड़ हत्याकांड मामले में आरोपी ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार को गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा। हाईकोर्ट ने पहलवान सुशील कुमार की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने कहा कि मामले की सुनवाई अभी चल रही है। अहम गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी है। ऐसे में आरोपी सुशील को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। वहीं बचाव पक्ष के वकील का कहना था कि महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। सुशील कुमार लम्बे अर्से से न्यायिक हिरासत में जेल में है। अभी मुकदमा लंबा चलेगा ऐसे में सुशील कुमार को जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए।
2021 में हुई थी सागर धनखड़ की हत्या
दरअसल, सुशील कुमार ने 6 फरवरी को रोहिणी अदालत द्वारा नियमित जमानत याचिका खारिज करने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुशील फिलहाल 2021 में हुए पहलवान सागर धनखड़ की हत्या के आरोप में न्यायिक हिरासत में हैं। जूनियर नेशनल कुश्ती चैंपियन पहलवान सागर धनखड़ की हत्या 4-5 मई 2021 की रात को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम परिसर में हुई थी।
आरोपपत्र के मुताबिक, सागर व उसके साथियों को कुछ लोग जबरन अगवा करके स्टेडियम में ले गए थे, जहां लाठी-डंडों और हॉकी स्टिक से उनकी बेरहमी से पिटाई की गई। बुरी तरह घायल सागर की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल खारिज कर दी थी रेगुलर बेल
बता दें कि, सुशील कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च 2025 में रेगुलर जमानत दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को यह कहते हुए जमानत रद्द कर दी थी कि अहम गवाहों से पूछताछ अभी बाकी थी। इसके बाद उन्होंने 20 अगस्त 2025 को सरेंडर कर दिया था।
उनके वकील ने कहा था कि परिस्थितियां काफी बदल गई हैं क्योंकि अभियोजन पक्ष के सभी अहम गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और आरोपी के अभियोजन पक्ष के सबूतों को प्रभावित करने या उनसे छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है। यह भी कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने सुशील कुमार को परिस्थितियों में बदलाव या नए आधार सामने आने पर संबंधित कोर्ट में नई जमानत अर्जी दाखिल करने की छूट दी थी।
जमानत अर्जी के अनुसार, इस मामले में अभियोजन पक्ष के 222 गवाह हैं, जिनमें से 42 अहम गवाहों (घायल व्यक्ति सहित) से पहले ही पूछताछ हो चुकी है।
गौरतलब है कि, सुशील कुमार को अर्जुन अवॉर्ड (2005), राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड (2009) और पद्म श्री (2011) से सम्मानित किया जा चुका है।


