MEA दिल्ली में है तो क्या? यूपी के पासपोर्ट मामले में HC का सुनवाई से इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट से जुड़ा विवाद सिर्फ इसलिए उसके सामने नहीं लाया जा सकता क्योंकि विदेश मंत्रालय दिल्ली में है। अदालत ने साफ किया कि क्षेत्राधिकार तभी बनेगा जब विवाद का कोई हिस्सा कोर्ट के दायरे में हुआ हो।

दिल्ली हाई कोर्ट कहा कि पासपोर्ट से जुड़ा कोई विवाद सिर्फ इसलिए उसके सामने नहीं लाया जा सकता, क्योंकि विदेश मंत्रालय (एमईए) राजधानी में स्थित है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र इस बात पर निर्भर करता है कि क्या विवाद का कोई हिस्सा कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में उत्पन्न हुआ।
याचिका में क्या की गई थी मांग?
इस तरह पीठ ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में पासपोर्ट में जन्म तिथि को ठीक करने की मांग की गई थी। पीठ ने पाया कि विवाद से जुड़े सभी तथ्य उत्तर प्रदेश में उत्पन्न हुए, न कि दिल्ली में।
अदालत ने खारिज की अर्जी
याचिकाकर्ता ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ) गाजियाबाद द्वारा 4 अगस्त, 2025 को जारी उस सूचना को चुनौती दी थी, जिसमें पासपोर्ट में दर्ज जन्म तिथि को ठीक करने के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था। उन्होंने अधिकारियों से पासपोर्ट से जांच रिपोर्ट का स्टेटस हटाने का निर्देश देने की भी मांग की थी।
यह हुई थी गलती
याचिकाकर्ता के अनुसार, उसका जन्म 9 नवंबर 2003 को आगरा के एक मेडिकल सेंटर में हुआ था। हालांकि आगरा नगर निगम द्वारा जारी उनके जन्म प्रमाण पत्र में गलती से जन्म तिथि 9 सितंबर, 2003 दर्ज हो गई।
इस वजह से हुई गलती
इस गलती को अक्टूबर 2006 में ठीक कर दिया गया, लेकिन 2011 में पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय उनके माता-पिता ने अनजाने में पुराना जन्म प्रमाण पत्र जमा कर दिया। नतीजतन गलत जन्म तिथि उनके पासपोर्ट में बनी रही, जिसमें 2016 व 2021 में बाद के नवीनीकरण (रिन्यूअल) भी शामिल थे।
गलती को ठीक करने की मांग
बालिग होने के बाद याचिकाकर्ता ने सही जन्म तिथि वाले जन्म प्रमाण पत्र के साथ-साथ अपने आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड व कक्षा 10 की मार्कशीट के आधार पर गलती को ठीक करने की मांग की। इन सभी दस्तावेजों में उनकी सही जन्म तिथि दर्ज थी।
क्षेत्राधिकार का दिया हवाला
केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सभी संबंधित अधिकारी और दस्तावेज उत्तर प्रदेश में थे और मामले का कोई भी हिस्सा दिल्ली में नहीं हुआ। केन्द्र की आपत्ति को स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र आगरा में जारी व ठीक किया गया। पासपोर्ट गाजियाबाद में आरपीओ द्वारा जारी व नवीनीकृत किया गया। संबंधित पत्र-व्यवहार भी गाजियाबाद से ही हुआ था। याचिकाकर्ता खुद उत्तर प्रदेश का निवासी है। ऐसे में क्षेत्राधिकार भी यूपी का ही बनता है।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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