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क्या और धमाके होंगे तब कदम उठाएंगे, पुरानी कारों के धंधे पर HC की दिल्ली सरकार को फटकार

क्या और धमाके होंगे तब कदम उठाएंगे, पुरानी कारों के धंधे पर HC की दिल्ली सरकार को फटकार

संक्षेप:

दिल्ली हाई कोर्ट ने पुरानी कारों की खरीद-बिक्री को रेगुलेट करने में विफल रहने पर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने दिल्ली सरकार से सवाल किया कि क्या वह दो-तीन और बम धमाकों का इंतजार कर रही है।

Dec 17, 2025 06:18 pm ISTKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री और ट्रांसफर के धंधे को ठीक तरह से रेगुलेट करने में विफल रहने पर दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि लाल किले पर हाल ही में हुआ बम धमाका भी एक सेकंड हैंड कार का इस्तेमाल करके किया गया था। ऐसे में यह मुद्दा बेहद संवेदनशील हो जाता है। अदालत ने सरकार से सवाल किया कि क्या वह दो-तीन और बम धमाकों का इंतजार कर रही है।

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बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की डिवीजन बेंच ने राष्ट्रीय राजधानी में सेकेंड हेंड यानी पुराने वाहनों की बिक्री और ट्रांसफर को रेगुलेट करने में नाकाम रहने पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि लाल किले पर हाल ही में हुआ बम धमाका भी एक सेकंड हैंड कार का इस्तेमाल करके किया गया था। इस घटना से यह मुद्दा बेहद गंभीर हो जाता है।

अदालत ने कहा कि एक कार चार हाथों से गुजरती है, फिर भी उसका असली मालिक नहीं बदलता है? असली मालिक कत्लखाने जाता है? यह क्या है? आप इसकी इजाजत कैसे दे रहे हैं। क्या जब दो-तीन और बम धमाके जो जाएंगे उसके बाद आप कोई कदम उठाएंगे। इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार को एक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अब इस मुद्दे पर अगली सुनवाई जनवरी 2026 में होगी।

एक संगठन की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार इस मामले पर एफिडेविट दाखिल करे। यह अदालत अब और तारीख नहीं देगी। याचिका में रजिस्टर्ड वाहनों के अधिकृत डीलरों को रेगुलेट करने के लिए दिसंबर 2022 में लागू सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स के नियम 55A से 55H को लागू करने में आ रही चुनौतियों का जिक्र किया गया है। दलील में कहा गया है कि रेगुलेटरी कमियों के साथ तमाम प्रक्रियात्मक बाधाओं से नियम कानून विफल साबित हुए हैं।

याचिका में कहा गया है कि सेकेंड हेंड वाहन अंतिम खरीदार तक पहुंचने से पहले कई डीलरों से गुजरते हैं। नियम केवल पहले अधिकृत डीलर को पहले ट्रांसफर को ही मान्यता देते हैं। ऐसे में पहले ही डीलर-टू-डीलर ट्रांसफर में कानूनी सिस्टम ध्वस्त हो जाता है। भारत में बहुत कम डीलर ही अधिकृत डीलर के तौर पर रजिस्टर्ड हैं। याचिकाकर्ता ने लाल किले के पास हुए आतंकी हमले का भी ज़िक्र किया। इसमें धमाके वाली कार कई बार बेची जा चुकी थी फिर भी उसके असली मालिक के नाम पर ही रजिस्टर्ड था।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


संक्षिप्त विवरण

कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

रिपोर्टिंग एवं विशेषज्ञता: कृष्ण बिहारी सिंह राजनीति, जिओ पॉलिटिक्स, जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। कृष्ण बिहारी सिंह ने अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में नेशनल, इंटरनेशनल, बिजनेस, रिसर्च एवं एक्सप्लेनर और संपादकीय टीमों के साथ लंबे समय तक काम किया है। यही वजह है कि खबर के पीछे छिपे एजेंडे की समझ रखने वाले केबी समसामयिक घटनाक्रमों पर गहरा विश्लेषण करते हैं।

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