दिल्ली की 91 कॉलोनियों पर खतरा, HC ने कहा- यमुना डूब क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाएं
दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में सभी अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि यमुना बाढ़ क्षेत्र में रिहायश को अनुमति देने का मतलब है पर्यावरण और नदी के किनारे को प्रभावित करना। कोर्ट के निर्देश के बाद यमुना बाढ़ क्षेत्र में 91 कॉलोनियों पर संकट मंडरा रहा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधि पर रोक के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण को पर्यावरण के लिए खतरा माना है। हालांकि, कोर्ट का यह आदेश 31 दिसंबर 2026 के बाद लागू होगा। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह एवं जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को निर्देश दिए कि वह सक्षम अधिकारी से यमुना बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण कराए। साथ ही कहा कि बाढ़ क्षेत्र में रिहायशी या व्यावसायिक गतिविधि पर रोक लगाई जाए। पीठ ने सक्षम प्राधिकारी को यमुना बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध निर्माणों की सूची तैयार कर कोर्ट में पेश करने के भी निर्देश दिए।
इस मामले में डीडीए की ओर से कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि मदनपुर खादर, झंगोला गांव और आईटीओ के पास से बड़ी संख्या में अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण को हटाया गया है। उनकी बाढ़ क्षेत्र से अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई भी जारी है। बाढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वजीराबाद और मंजनू का टीला इलाके में भी अतिक्रमण हटाने के लिए अवैध ढांचों को चिह्नित किया जा चुका है। इस पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
खुद निगरानी करेगा कोर्ट
हाई कोर्ट ने कहा कि यमुना बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर सीधे उसकी नजर रहेगी। किसी भी कीमत पर यहां अतिक्रमण की मंजूरी नहीं दी जा सकती। यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का काम है। वहीं, निगम बोध घाट से लगते यमुना बाजार इलाके में रहने वाले लोगों से उनके घर को खाली करने के लिए कहा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंगलवार को नोटिस चस्पा किया गया था, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आने वाले यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र वाले को इलाके को सभी तरह के अतिक्रमण से मुक्त किया जाना है।
चौंकाने वाला खुलासा
दिल्ली सरकार की तरफ से मामले की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि दिल्ली में बाढ़ क्षेत्र (ओ जोन) में 91 कॉलोनियों और गांव बसे हैं। सरकार ने माना कि यह अवैध होने के साथ-साथ अनधिकृत हैं। इन कॉलोनियों की आबादी पांच से छह लाख के करीब है। सरकार अभी दिल्ली सरकार के कई विभागों से इस बारे में बातचीत कर रही है।
दिल्ली सरकार के अतिरिक्त सचिव ने बताया कि इन कॉलोनियों का यहां बना रहना किसी भी तरह से उचित नहीं है। इसलिए यहां की आबादी के लिए करीब एक लाख घरों की जरूरत होगी। उन्होंने बताया कि इनके पुनर्वास के लिए रणनीति बनाई जा रही है। जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा।
91कॉलोनियों पर मंडरा रहा खतरा
हाई कोर्ट ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधि पर रोक के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण को पर्यावरण के लिए खतरा माना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यमुना बाढ़ क्षेत्र में 91 कॉलोनियों और गांव हैं। अब इन कॉलोनियों और गांवों में रहने वालों पर विस्थापन का संकट मंडरा रहा है। हालांकि, सरकार इनके पुनर्वास की बात कह रही है। दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि इन कॉलोनियों व गांवों में करीब छह लाख लोग रह रहे हैं।
कौन से इलाके आते हैं?
यमुना फ्लडप्लेन के भीतर 91 अनधिकृत कॉलोनियां हैं। इनमें मदनपुर खादर, जैतपुर, मीठापुर, झंगोला, सोनिया विहार के कुछ हिस्से, खजूरी खास, करावल नगर समेत यमुना किनारे के कई इलाके शामिल बताए जाते हैं। ओ-जोन बाढ़ क्षेत्र है, इसलिए कई इलाकों का पूरा हिस्सा इसके अंतर्गत नहीं आता है। केवल यमुना के करीब स्थित कुछ हिस्से ही आते हैं।
क्या है ओ-जोन?
दिल्ली सरकार के मास्टर प्लान-2021 के अनुसार, यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को ओ-जोन घोषित किया गया है। यह इलाका वजीराबाद से ओखला तक करीब 22 किलोमीटर में फैला हुआ है और लगभग 9700 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है। राजधानी के इस इलाके का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और यमुना को प्रदूषण से बचाना है। नियमों के अनुसार यहां स्थायी निर्माण नहीं हो सकता है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


