फैसला हुए मामलों में व्यक्ति का नाम सर्च की सुविधा होगी बंद; दिल्ली HC का क्या आदेश?
दिल्ली हाईकोर्ट ने सर्च इंजनों को फैसला हो चुके कई मामलों में व्यक्ति का नाम खोजने की सुविधा बंद करने का निर्देश दिया है। क्या है दिल्ली हाई कोर्ट का ताजा आदेश जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि गूगल जैसे सर्च इंजन उन मामलों में नाम-आधारित खोज के माध्यम से न्यायिक अभिलेखों को अनिश्चित काल तक प्रदर्शित नहीं कर सकते। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि निजी प्रकृति के हों या आरोपी के बरी होने, आरोपमुक्त किए जाने, कार्यवाही रद्द किए जाने अथवा समझौते के कारण मामले का निस्तारण संबंधी आदेश हों। दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यक्ति के भुला दिए जाने के अधिकार को मान्यता दी है।
नाम-आधारित खोज सुविधा को निष्क्रिय करें
याचिकाकर्ताओं के एक समूह को राहत देते हुए हाई कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारियों, विभिन्न सर्च इंजन के संचालकों व कानूनी डेटाबेस मंचों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं की ओर से उद्धृत निर्णयों, आदेशों और समाचार लेखों के संबंध में अपनी नाम-आधारित खोज सुविधा को निष्क्रिय करें तथा उन्हें खोज परिणामों से हटा दें (डी-इंडेक्स करें)।
डी-इंडेक्स का आशय
डी-इंडेक्स करने का अर्थ है किसी विशेष वेबपेज या वेबसाइट को सर्च इंजन के डेटाबेस से हटाना, ताकि वह सामान्य खोज परिणामों में दिखाई न दे।
ऐसे गंभीर मामलों में डी-इंडेक्स सही नहीं
हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं या बच्चों के विरुद्ध अपराधों, सार्वजनिक विश्वास के उल्लंघन से जुड़े अपराधों, लोकसेवकों, निर्वाचित प्रतिनिधियों आदि द्वारा किए गए अपराधों में दोषसिद्धि से संबंधित मामलों में डी-इंडेक्स करना उपयुक्त नहीं होगा।
अपने 144 पृष्ठों के निर्णय में दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ताओं को संबंधित न्यायालय से मूल निर्णय या आदेश में खुद की पहचान छिपाने का अनुरोध करने की स्वतंत्रता होगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि जिन अभिलेखों की अंतर्निहित कार्यवाही संबंधित व्यक्ति के पक्ष में हल हो चुकी है, उनकी असीमित व अप्रतिबंधित नाम-आधारित खोज क्षमता से किसी भी वैध या विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती है।
गंभीर आरोपों के मामले में राहत नहीं
वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने पीपी माधवा को राहत देने से इनकार कर दिया, जिन्होंने खुद को एक सार्वजनिक हस्ती बताते हुए यौन अपराध के मामले में समझौते के बाद मामले को डी-इंडेक्स करने का अनुरोध किया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हस्ती के खिलाफ गंभीर आरोपों से संबंधित कार्यवाही की सुलभता जनहित में है।
भुला दिए जाने का अधिकार टूल नहीं
दिल्ली हाई कोर्ट ने रियलिटी शो के मशहूर हस्ती आशुतोष कौशिक की राहत याचिका को भी खारिज कर दिया, जिन्होंने नशे में धुत व्यवहार की कई घटनाओं को दर्शाने वाली पोस्ट, वीडियो व लेख हटाने का अनुरोध किया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि भुला दिए जाने का अधिकार किसी सार्वजनिक हस्ती के अतीत के आचरण को चुनिंदा रूप से हटाने का तंत्र नहीं है।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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