दिल्ली HC ने नेत्रहीन लड़की से रेप के दोषी की सजा 6 साल घटाई; इस ‘चूक’ का मिला फायदा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने वैन के अंदर 12 साल की एक नेत्रहीन लड़की से दुष्कर्म के दोषी वैन ड्राइवर की जेल की सजा को 20 साल से घटाकर 14 साल कर दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए दोषी की सजा में यह बदलाव किया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक व्यक्ति को अपनी वैन में दृष्टिबाधित नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने का दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि उसने लड़की की बेबसी का फायदा उठाया। हालांकि, कोर्ट ने उसकी जेल की सजा को 20 साल से घटाकर 14 साल कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को देखते हुए निचली अदालत दुष्कर्म के अपराध के लिए या तो कम से कम 10 साल की सजा या उम्रकैद की सजा सुना सकती थी, लेकिन वह 14 साल से अधिक की कोई तय सजा नहीं सुना सकती थी।
जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने कहा, ''अपीलकर्ता/आरोपी ने पीड़िता की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसे अपनी गाड़ी में बिठाया, उसके साथ मौजूद बच्चों को रोका और धमकाया और फिर उससे दुष्कर्म किया। जिस तरह से यह अपराध किया गया, वह भी सजा को और गंभीर बनाने वाली बात है।''
13 साल पहले नाबालिग लड़की से हुआ था दुष्कर्म
हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता कोई सक्षम वयस्क नहीं थी, जो उस स्थिति में खुद की रक्षा कर सके, और रिकॉर्ड में ऐसी कोई ठोस बात सामने नहीं आई है, जिससे अधीनस्थ अदालत द्वारा दी गई सजा में बदलाव को सही ठहराया जा सके। हालांकि, अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को देखते हुए निचली अदालत 20 साल की सजा नहीं दे सकती थी, जबकि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ऐसा करने का अधिकार रखते हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सलीम ने सितंबर 2013 में हुमायूं के मकबरे के पास एक दरगाह के सामने खड़ी वैन में नाबालिग लड़की की मजबूरी का फायदा उठाकर उसका यौन शोषण किया।
पीड़िता के भाई ने दी थी गवाही
घटना के समय वैन में मौजूद पीड़िता के भाई ने गवाही दी कि वह अपनी बहन के साथ बाजार गया था, जहां आरोपी ने उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद उसने भाई-बहन और दो अन्य बच्चों को अपनी वैन से घर छोड़ने की पेशकश की और वे गाड़ी में बैठ गए। गवाह ने बताया कि कुछ देर बाद चालक ने गाड़ी रोकी और उनके मुंह बंद कर दिए और उसकी बहन के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद चालक ने बच्चों को एक पार्क के पास उतार दिया और उन्हें कुछ पैसे दिए। पीड़िता के भाई ने अदालत में बताया कि चालक ने उन्हें धमकी दी कि यदि उन्होंने इस घटना के बारे में किसी को बताया, तो वह उन्हें चाकू मार देगा। आरोपी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया। सजा के मुद्दे पर आरोपी ने हाईकोर्ट से उसके प्रति नरमी बरतने का अनुरोध किया। बता दें कि, 12 वर्षीय पीड़िता की आंखों की रोशनी तीन साल की उम्र में चली गई थी।


