मुकरबा चौक पर हर साल 6 से 10 लोग जान गवां देते हैं, HC ने समाधान की योजना पेश करने को कहा
दिल्ली-हरियाणा और बाहरी दिल्ली को जोड़ने वाले मुकरबा चौक का घंटों का जाम अब आफत बन गया है। एक दशक से ज्यादा समय से इस चौक की कई खामियों को समाप्त कराने के लिए दर्जनों शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला। यहां प्रत्येक वर्ष 6 से 10 लोग सड़क हादसों में जान गवां देते हैं।

दिल्ली-हरियाणा और बाहरी दिल्ली को जोड़ने वाले मुकरबा चौक का घंटों का जाम अब आफत बन गया है। एक दशक से ज्यादा समय से इस चौक की कई खामियों को समाप्त कराने के लिए दर्जनों शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला। यह दिल्ली का बड़ा ब्लैक स्पॉट है, जहां प्रत्येक वर्ष 6 से 10 लोग सड़क हादसों में जान गवां देते हैं। अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अंतर समन्वय समिति बनाने पर जोर दिया है, जिससे कई विभाग एक साथ मिलकर इस समस्या का समाधान कर सकें।
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, एनसीआरटीसी, डीएमआरसी, बाढ़ एवं सिंचाई विभाग, बिजली कंपनी टीपीडीडीएल, एकीकृत यातायात और परिवहन अवसंरचना (योजना एवं अभियांत्रिकी) केन्द्र, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली पुलिस, वन विभाग और नगर निगम समेत सभी पक्षकारों को इस समस्या को मिल-बैठकर सुलझाने को कहा है। पीठ ने सभी पक्षकारों को बिन्दुवार तरीके से जवाब देने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
प्राथमिकता पर रखने को कहा
पीठ ने अपने आदेश में इस मामले को प्राथमिकता पर रखने को कहा है। साथ ही, पक्षकारों से कहा कि अगली सुनवाई पर इस समस्या के समाधान की योजना लेकर पेश हों, ताकि मुकरबा चौक ही नहीं उसके आस-पास के इलाके व पंजाब-हरियाणा की तरफ से आने वाले वाहनों के आवागमन को सुलभ बनाया जा सके।
हर साल 6 से 10 लोग जान गवां देते हैं
मुकरबा चौक न केवल जाम बल्कि सड़क हादसों के लिए भी जाना जाता है। यह दिल्ली का बड़ा ब्लैक स्पॉट है, जहां प्रत्येक वर्ष 6 से 10 लोग सड़क हादसों में जान गवां देते हैं। यह जनहित याचिका गुरु हनुमान सोसायटी ऑफ इंडिया की तरफ से सामाजिक कार्यकर्ता अतुल रणजीत कुमार ने दायर की। उन्होंने इसमें आउटर रिंग रोड पर बोटल-नेक और यातायात के विलय के कारण उत्पन्न होने वाले गंभीर जाम की समस्या को उठाया।
जनहित याचिका में ये समाधान सुझाए गए
● जीटी करनाल बाईपास पर बाईपास फ्लाईओवर बनाया जाना चाहिए
● बादली मोड़ रेलवे ओवरब्रिज पर बने बोटलनेक से निजात पाने के लिए इसका चौड़ीकरण
● मंगोलपुरी रेलवे ओवरब्रिज पर बोटलनेक से निजात पाने के लिए इसका चौड़ीकरण
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
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