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‘ग्रैप लागू करने का उद्देश्य यह नहीं…’; वर्क फ्रॉम होम की मांग वाली साइंटिस्ट की याचिका दिल्ली HC ने की खारिज

‘ग्रैप लागू करने का उद्देश्य यह नहीं…’; वर्क फ्रॉम होम की मांग वाली साइंटिस्ट की याचिका दिल्ली HC ने की खारिज

संक्षेप:

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित एक संगठन में कार्यरत एक सीनियर साइंटिस्ट की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उसने ऑफिस परिसर में खराब वायु गुणवत्ता के चलते घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

Dec 14, 2025 07:52 am ISTPraveen Sharma नई दिल्ली, भाषा
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दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित एक संगठन में कार्यरत एक सीनियर साइंटिस्ट की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उसने ऑफिस परिसर में खराब वायु गुणवत्ता के चलते घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

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हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की यह दलील कि वह चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) दिशानिर्देशों के अनुसार घर से काम करने के हकदार हैं, "गलत" है, क्योंकि इसे देखने से पता चलता है कि यह केंद्र सरकार को अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा प्रदान करने की अनुमति देने के संबंध में उचित निर्णय लेने का विवेकाधीन दायित्व प्रदान करता है, ना कि अनिवार्य दायित्व।

अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा बताई गई चिकित्सीय आपात परिस्थितियों पर गौर करते हुए कहा कि यदि उनकी स्वास्थ्य स्थिति ऐसी आवश्यकता उत्पन्न करती है, तो वह दिल्ली से बाहर स्थानांतरण के लिए अपने नियोक्ता से अनुरोध करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

अदालत ने कहा कि नियोक्ता को इस अनुरोध पर सकारात्मक रूप से विचार करने का प्रयास करना चाहिए।

जस्टिस सचिन दत्त ने 9 दिसंबर को पारित एक आदेश में कहा, ‘‘ग्रैप लागू करने का उद्देश्य यह नहीं है कि उससे किसी एक कर्मचारी को कोई व्यक्तिगत कानूनी अधिकार मिल जाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बजाय, यह संस्थानों, प्राधिकरणों और नागरिकों पर यह जिम्मेदारी डालता है कि वे, जहां तक संभव और व्यवहारिक हो, इसमें बताए गए प्रदूषण कम करने के उपायों का पालन करें और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग दें।’’

याचिकाकर्ता, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) में ‘वैज्ञानिक-ई’ के पद पर कार्यरत है और उसने खतरनाक वायु गुणवत्ता तथा श्वसन संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए घर से काम करने की अनुमति मांगी थी।

उसने कहा कि संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे उसके कार्यालय परिसर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जारी सभी जीआरएपी आदेशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही, उसने सक्षम प्राधिकरणों द्वारा परिसर के निरीक्षण के लिए भी निर्देश मांगे।

याचिका में यह अनुमति मांगी गई कि जब तक कार्यालय प्राधिकारी यह प्रमाणित करने की स्थिति में ना हों कि कार्यालय के अंदर की वायु गुणवत्ता स्वीकार्य सीमा के भीतर है, तब तक याचिकाकर्ता को घर से कार्य करने की अनुमति दी जाए।

उसका दावा था कि डॉक्टर ने उसे ‘धूल और धुएं के संपर्क से बचने’ की सलाह दी है।अदालत ने यह कहते हुए कि याचिका खारिज कर दी कि उसमें कोई दम नहीं है।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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