यमुना बाजार में नहीं रुकेगी तोड़फोड़, कभी भी गरज सकता बुलडोजर; दिल्ली HC ने ठुकराई अर्जी
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यमुना बाजार रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की प्रस्तावित तोड़फोड़ की कार्रवाई पर एक हफ्ते के लिए रोक लगाने वाली अर्जी भी खारिज कर दी है। इससे कभी भी बुलडोजर चल सकता है। संभावना है कि ये तोड़फोड़ कल शुरू हो जाएगी।
दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में तोड़फोड़ जारी रहेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने लोगों के बेदखली नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही 300 से ज्यादा परिवारों की मुश्किलें बढ़ने वालीं हैं। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यमुना बाजार रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की प्रस्तावित तोड़फोड़ की कार्रवाई पर एक हफ्ते के लिए रोक लगाने वाली अर्जी भी खारिज कर दी है। इससे कभी भी बुलडोजर चल सकता है। संभावना है कि ये तोड़फोड़ कल शुरू हो जाएगी।
कोर्ट ने कहा- यह PIL नहीं है
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, “यह कोई जनहित याचिका (PIL) नहीं है। इसे स्थानीय निवासियों के कहने पर एसोसिएशन ने दायर किया है। उचित ऑथराइजेशन के बिना यह याचिका मेंटेनेबल नहीं है।” हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि निवासी उचित अनुमति के साथ नई याचिका दाखिल करने के लिए स्वतंत्र हैं।
याचिका में तोड़फोड़ रोकने की क्या दलीलें दी गईं
याचिका में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 के तहत जारी डेमोलिशन नोटिस को रद्द करने और जबरन कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि प्रशासन ने पूरे इलाके को “अवैध अतिक्रमण” मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी, जबकि यमुना घाटों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को नजरअंदाज किया गया।
याचिका में दावा किया गया कि यहां पीढ़ियों से पंडा समुदाय के लोग रह रहे हैं और यह इलाका सिर्फ एक बस्ती नहीं, बल्कि यमुना रिवरफ्रंट से जुड़ा सामाजिक और धार्मिक ढांचा भी है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 का उल्लंघन है।
कोर्ट में क्या बोला प्रशासन
हालांकि प्रशासन ने कोर्ट में कहा कि यमुना बाजार इलाका यमुना के बाढ़ प्रभावित O-Zone में आता है। हर साल बाढ़ का खतरा रहने की वजह से यहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। अधिकारियों ने इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों का भी हवाला दिया।
प्रशासन के जबाव का याचिकाकर्ता ने क्या तर्क दिया
दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि प्रस्तावित कार्रवाई दिल्ली मास्टर प्लान 2041 की भावना के खिलाफ है। मास्टर प्लान में यमुना रिवरफ्रंट को एक इको-कल्चरल ज़ोन माना गया है, जहां विकास के दौरान विरासत और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना जरूरी बताया गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि प्रशासन ने एक जैसा तरीका अपनाते हुए पर्यावरणीय चिंताओं और इलाके की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश नहीं की। यह याचिका एडवोकेट संदीप त्यागी के जरिए दायर की गई थी।
खबर में इस्तेमाल तस्वीर प्रतीकात्मक है।
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Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
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रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
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