यह उनका संवैधानिक अधिकार है, माता-पिता दखल नहीं दे सकते; शादी के मामले में दिल्ली HC
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि सहमति से शादी करने वाले वयस्कों को एक-दूसरे से शादी करने का संवैधानिक अधिकार है। न तो समाज, न ही सरकारी मशीनरी और न ही उनके माता-पिता उनके इस फैसले में दखल दे सकते हैं। हाई कोर्ट ने यह आदेश एक कपल की याचिका पर दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि सहमति से शादी करने वाले वयस्कों को एक-दूसरे से शादी करने का संवैधानिक अधिकार है। न तो समाज, न ही सरकारी मशीनरी और न ही उनके माता-पिता उनके इस फैसले में दखल दे सकते हैं। हाई कोर्ट ने यह आदेश एक कपल की याचिका पर दिया। याचिका में कपल ने महिला के पिता से सुरक्षा मांगी थी जो उनकी शादी से सहमत नहीं थे।
कपल को पुलिस सुरक्षा का आदेश देते हुए जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि शादी का अधिकार इंसान की आजादी और पसंद का हिस्सा है। यह संविधान के आर्टिकल 21 और मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का एक जरूरी पहलू है।
कोर्ट ने 2 फरवरी को दिए गए आदेश में कहा कि क्योंकि याचिकाकर्ता बालिग हैं और एक-दूसरे से शादी करने का उन्हें पूरा हक है। उन्होंने अपनी मर्जी से शादी के पवित्र बंधन में बंधकर जिंदगी भर एक-दूसरे का साथ निभाने का फैसला किया है। इसलिए अब कोई भी, खासकर समाज, सरकारी मशीनरी या उनके माता-पिता, रिश्तेदार या दोस्त, याचिकाकर्ताओं के फैसले में किसी भी तरह से दखल नहीं दे सकते।
आदेश में आगे कहा गया है कि असल में, शादी करने के उनके फैसले को पवित्रता दी जानी चाहिए। खासकर इसलिए क्योंकि याचिकाकर्ता बालिग हैं और उनके पास अपने जीवन साथी को चुनने का संवैधानिक अधिकार है।
इस जोड़े ने जुलाई 2025 में एक आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार शादी की और फिर संबंधित सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के सामने इसे रजिस्टर करवाया। जोड़े ने आरोप लगाया था कि महिला के पिता इस शादी से खुश नहीं थे और उन्हें धमकी दे रहे थे।
कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को, खासकर महिला के पिता को, याचिकाकर्ताओं की जान और आजादी को धमकी देने की इजाजत नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ताओं को अपने पर्सनल फैसलों और पसंद के लिए किसी सोशल मंजूरी की जरूरत नहीं है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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