यह तो मालिक के बजाय चोर को घर की चाबी देने जैसा; 'मेटा' की किस नीति पर HC ने जताई हैरानी, मांगा जवाब

हिन्दुस्तान टाइम्स, श्रुति कक्कड़, नई दिल्ली
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वर्तमान मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की अदालत ही इस मुद्दे पर कंटेंट क्रिएटर सौरभ मौर्य की तरफ से दायर की गई याचिका पर भी विचार कर रही है। मौर्य का इंस्टाग्राम अकाउंट भी एक कॉपीराइट स्ट्राइक के बाद सस्पेंड कर दिया गया था, हालांकि यह स्ट्राइक बाद में गलत पाई गई थी।

Delhi HC asks Meta to explain its access policy on copyright management tool
दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा से कॉपीराइट मैनेजमेंट टूल पर अपनी एक्सेस पॉलिसी के बारे में बताने को कहा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पैरेंट कंपनी 'मेटा' को एक नोटिस जारी किया और उससे उन नियमों या मापदंडों के बारे में बताने को कहा, जिनके आधार पर यूजर्स को उसके 'कॉपीराइट मैनेजमेंट टूल' का एक्सेस दिया जाता है। यह वह टूल है, जो लोगों को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपने ओरिजिनल कंटेंट को सुरक्षित रखने और उसे मैनेज करने की सुविधा देता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि, 'यह तो घर के मालिक के बजाय चोर को चाबी देने जैसा है'।

हाईकोर्ट ने मेटा को यह निर्देश कंटेंट क्रिएटर मोहित कुमार की एक याचिका पर जारी किया, जिसमें कुमार ने शिकायत की थी कि कुछ लोगों ने उनका कंटेंट डाउनलोड किया और 'मेटा राइट्स टूल' के एक्सेस का इस्तेमाल करके उनके निजी वीडियो पर ही कॉपीराइट का दावा कर दिया।

'खुद के वीडियो पर नहीं कर सके कॉपीराइट का दावा'

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की बेंच के सामने कुमार ने बताया कि वह खुद वीडियो पर कॉपीराइट का दावा नहीं कर सकते थे क्योंकि मेटा ने उन्हें इस टूल का एक्सेस ही नहीं दिया। कुमार ने अदालत को बताया कि उन्होंने इस टूल के एक्सेस के लिए तीन बार आवेदन किया, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के उनके आवेदन खारिज कर दिए गए, जबकि कुछ सौ फॉलोअर्स वाले लोगों को भी इसका एक्सेस मिल गया।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताए इस नीति के अन्य नुकसान

आगे मोहित कुमार ने इस फर्जीवाड़े से होने वाले अन्य नुकसानों की जानकारी देते हुए अदालत को बताया कि फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक के कारण किसी असली क्रिएटर का अकाउंट रातों-रात बंद भी किया जा सकता है, जिससे उसकी सालों की मेहनत, कमाई, ब्रांड कोलैबोरेशन और बिजनेस के मौके खत्म हो सकते हैं। कुमार एक भारतीय ई-कॉमर्स और AI बिजनेस कोच हैं जो सोशल मीडिया पर 'राइज विद मोहित' (Rise with Mohit) हैंडल से एजुकेशनल कंटेंट बनाते हैं।

अदालत ने कहा- यह तो चोर को चाबी देने जैसा

सुनवाई के दौरान मोहित कुमार के तर्कों को सुनने के बाद जस्टिस भंभानी ने तीखी टिप्पणी की और कहा कि, 'तो फिर हर किसी के पास इसका एक्सेस क्यों नहीं है? यह तो घर के मालिक के बजाय चोर को चाबी देने जैसा है।' उधर मेटा के वकील ने अदालत को बताया कि कुमार के खिलाफ जारी की गई फर्जी स्ट्राइक को वापस ले लिया गया था और उन स्ट्राइक के कारण हटाया गया कंटेंट वापस बहाल कर दिया गया था।

24 सितंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई

सुनवाई के बाद कोर्ट ने कुमार के मुकदमे में समन जारी किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख तय की। कोर्ट ने गौर किया कि कंटेंट क्रिएटर्स से जुड़े कई मामलों में यह मुद्दा सामने आया है और इसलिए इस पर बारीकी से विचार करने की जरूरत है। इसके साथ ही कोर्ट ने मेटा के लिए टिप्पणी करते हुए कहा कि, 'सिस्टम में कुछ कमियां हैं और कुछ खामियां देखी गई हैं। बेहतर होगा कि हम इसे ठीक कर लें।'

एक अन्य मामले की सुनवाई भी होगी उसी दिन

कोर्ट का यह निर्देश उस घटना के कुछ दिनों बाद आया है जब अदालत ने इस बात की जांच करने पर सहमति जताई थी कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर यूजर अकाउंट को सस्पेंड या डिलीट कर सकते हैं। इस बारे में 24 सितंबर को सुनवाई होगी। वर्तमा मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की अदालत ही इस मुद्दे पर कंटेंट क्रिएटर सौरभ मौर्य की तरफ से दायर की गई याचिका पर भी विचार कर रही है, मौर्य का इंस्टाग्राम अकाउंट एक कॉपीराइट स्ट्राइक के बाद सस्पेंड कर दिया गया था, जो बाद में गलत पाई गई थी।

Sourabh Jain

लेखक के बारे में

Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: सौरभ जैन भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक हिस्सा हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट सेक्शन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे पिछले लगभग तीन सालों से यहां कार्यरत हैं। सौरभ का करियर टीवी मीडिया से शुरू होकर डिजिटल मीडिया की गतिशीलता तक फैला हुआ है, जो उन्हें खबरों को गहराई और सटीकता के साथ प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कार्य अनुभव

सौरभ ने बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। इस क्षेत्र में साल 2009 से सक्रिय होने के बाद सौरभ ने पहले टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग डेस्क पर कार्य अनुभव लिया, इस दौरान उन्होंने टिकर डेस्क से शुरुआत करने के बाद न्यूज डेस्क में कॉपी राइटिंग का अनुभव हासिल किया, इस दौरान क्षेत्रीय विषयों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खबरें लिखीं। इसके बाद उन्हें बॉलीवुड और हेल्प-लाइन डेस्क में भी काम करने का मौका मिला। हेल्प लाइन डेस्क में काम करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य, करियर और आम लोगों से जुड़े कई विषयों को जानने व समझने का मौका मिला।

इसके बाद साल 2016 में उन्होंने डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा और स्पोर्ट्स डेस्क के साथ शुरुआत की। सौरभ ने अपने करियर की शुरुआत ZEE24 छत्तीसगढ़ न्यूज चैनल से की थी। इसके बाद वे IBC24 और दैनिक भास्कर जैसी संस्थाओं में भी सेवाएं दे चुके हैं। सौरभ साल 2023 से लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं और यहां पर स्टेट डेस्क में कार्यरत हैं। सौरभ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन दोनों यहीं से किया है। इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री ली है।

सौरभ जैन का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी सही तथ्यों व आसान भाषा में पाठकों तक खबरें पहुंचाना है। इस काम में तेजी जितनी जरूरी है, सटीकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। फिर चाहे वह आम जीवन की खबरें हों, राजनीति की खबरें हों, खेल की खबरें हों या फिर चकाचौंध से भरे बॉलीवुड की खबरें हों। कोई भी खबर सही तथ्यों के साथ रीडर्स तक पहुंचनी चाहिए। हड़बड़ी में तथ्यों की पुष्टि ना होने पर गलत जानकारी पाठकों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसलिए सौरभ का मानना है कि पत्रकारिता का मतलब केवल पाठकों तक सूचना पहुंचाना ही नहीं, बल्कि सही और निष्पक्ष जानकारी पहुंचाते हुए उनकी बुद्धिमत्ता और विवेक को भी जागृत करना होता है।

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