'खून की होली' की धमकियां दी जा रहीं मी-लॉर्ड! दिल्ली HC पहुंचा उत्तम नगर में तनाव का मामला
दिल्ली के उत्तम नगर में होली पर हुए एक लड़के की हत्या के मामले ने ईद पर सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है। ईद पर 'खून की होली' खेलने की धमकियों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने सुरक्षा से जुड़ी एक याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। याचिका में कोर्ट से ईद पर सुरक्षा की मांग की गई है।

दिल्ली के उत्तम नगर में होली पर हुए एक लड़के की हत्या के मामले ने ईद पर सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है। ईद पर 'खून की होली' खेलने की धमकियों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने सुरक्षा से जुड़ी एक याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। याचिका में कोर्ट से ईद पर सुरक्षा की मांग की गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट ईद के दौरान उत्तम नगर क्षेत्र में हिंसा रोकने के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए पेश याचिका में कहा गया है कि इलाके के लोगों को धमकी दी जा रही है कि इस ईद के दौरान 'खून की होली' खेली जाएगी।
दरअसल, होली के दिन दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में एक बच्ची की पानी से भरे गुब्बारे से भड़की हिंसा में तरुण नाम के युवक की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, यह घटना जेजे कॉलोनी में होली मनाने के दौरान दो परिवारों के लोगों के बीच विवाद हो गया।
शुरुआती जांच से पता चला कि विवाद एक महिला पर गुब्बारे फटने से रंग पड़ने के बाद शुरू हुआ। विवाद ने हिंसक झड़प का रूप ले लिया। घटना से अंजाम तरूण नाम का युवक दोस्तों के साथ होली खेलने के बाद घर लौट रहा था। इसी दौरान करीब 15-20 लोगों की भीड़ ने पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी थी।
उत्तम नगर तरुण मर्डर केस में दिल्ली पुलिस 3 महिलाओं सहित कुल 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। घटना के बाद तीनों महिलाएं फरार हो गई थीं। कथित तौर पर महिलाएं ख्याला में छिपी हुई थीं। सायरा नाम की महिला पर गुब्बारे का छींटा पड़ा था। आरोप है कि उसी ने अपने परिवार को बुलाया, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ था।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


