
DGCA पर थकान प्रबंधन नियमों में छूट देने का आरोप, दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने उस अवमानना याचिका पर डीजीसीए से जवाब मांगा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि डीजीसीए ने एयरलाइनों को पायलट थकान प्रबंधन नियमों में विस्तार देते हुए छूट दी है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडियन पायलट्स गिल्ड (आईपीजी) की ओर से दाखिल एक अवमानना याचिका पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डीजीसीए ने एयरलाइनों को पायलट थकान प्रबंधन नियमों में विस्तार देते हुए छूट दी है। जस्टिस अमित शर्मा की पीठ ने डीजीसीए को नोटिस जारी किया है। पीठ ने डीजीसीए के वरिष्ठ अधिकारियो को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल, 2026 को तय की है। याचिका में कहा गया है कि डीजीसीए ने एयरलाइन-विशिष्ट योजनाओं को मंजूरी देकर नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) मानदंडों को कमजोर कर दिया है जो पहले अदालत के सामने रखी गई समय सीमा और शर्तों का पूरी तरह से पालन नहीं करते हैं।
हालांकि डीजीसीए के वकील ने अवमानना याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अदालत ने सीएआर की सामग्री को निर्धारित नहीं किया था। जबकि कार्यान्वयन की समय-सीमा बाध्यकारी थी, नियामक ने विमान अधिनियम व नियमों के तहत अस्थायी, मामले-विशिष्ट छूट देने के लिए वैधानिक शक्तियां बरकरार रखीं थीं। यह भी तर्क दिया गया कि ऐसी समिट थी। समीक्षा के अधीन थीं। सीएआर लागू है। साथ ही यह भी कहा गया कि यह मुद्दा पहले सही उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष लंबित है।
याचिका के अनुसार, अदालत ने पहले डीजीसीए के इस आश्वासन को दर्ज किया था कि नए एफडीटीएल मानदंडों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें अधिकांश प्रावधान 1 जुलाई, 2025 तक व शेष 1 नवंबर, 2025 तक लागू होंगे। पायलटों के निकाय ने आरोप लगाया कि इस आश्वासन के बावजूद नियामक ने कोर्ट की अनुमति के बिना एयरलाइंस को छूट दी, जिससे उड़ान व यात्रियों दोनों की सुरक्षा के लिए बनाए गए थकान नियमों को कमजोर किया गया।
ज्ञात रहे कि 5 दिसंबर को बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के बीच डीजीसीए ने इंडिगो को अपने एयरबस A320 पायलटों के लिए नए एफडीटीएल मानदंडों के तहत विशेष रात्रि संचालन से संबंधित परिवर्तनों से अस्थायी एक बार की छूट दी। पायलट निकायों ने इस छूट को इस बात के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया है कि नियमों को कैसे कमजोर किया जा रहा है।
नवंबर 2025 में फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने अवमानना याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि डीजीसीए जानबूझकर हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने में विफल रहा है। यूनियन ने दावा किया कि अदालत को आश्वासन देने के बावजूद नियामक ने एयरलाइंस को विस्तार व छूट दी। ऐसे थकान प्रबंधन योजना को मंजूरी दी जो सीएआर 2024 के नियमों या तय समय-सीमा के मुताबिक नहीं है।





