दोनों नाम सिर्फ सुनने में एक जैसे; दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि को दी बड़ी राहत
धोखे से समानता के आरोप को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि हालांकि 'गौनाइल' और 'गोनाइल' सुनने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन विवादित मार्क का मूल्यांकन पूरे तौर पर किया जाना चाहिए।

दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वामी रामदेव के नेतृत्व वाली पतंजलि कंपनी को एक बड़ी राहत देते हुए 'पतंजलि गोनाइल' ट्रेडमार्क को बरकरार रखा है। साथ ही कोर्ट ने होली काउ फाउंडेशन की उस सुधार याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने पतंजलि कंपनी के ट्रेडमार्क को अपने मार्क 'गौनाइल' से मिलता-जुलता बताया था। इस बारे में 9 जनवरी को दिए अपने फैसले में कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता अपने इस दावे को साबित करने में विफल रहा है कि वह गौनाइल मार्क (नाम) को काफी पहले से और लगातार इस्तेमाल कर रहा है।
नहीं माना पहले से इस्तेमाल का दावा
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दावा किया था कि वह साल 2013 से 'गौनाइल' उत्पाद को बना रहा है, हालांकि जस्टिस तेजस कारिया ने इस दावे के संबंध में पेश किए गए दस्तावेज़ी सबूतों में गंभीर विसंगतियां पाईं। जिसके बाद अदालत ने कहा कि ट्रेडमार्क पतंजलि गोनाइल फ्लोर क्लीनर वैध रूप से रजिस्टर्ड है और धोखे से याचिकाकर्ता के मार्क 'गौनाइल' से मिलता-जुलता नहीं है।
पेश किए गए बिलों की तारीख में मिली गड़बड़ी
अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि होली काउ फाउंडेशन द्वारा पेश किए गए इनवॉइस (बिल) में तारीखें क्रम के हिसाब से सही नहीं थीं, जिससे उनकी प्रामाणिकता पर संदेह पैदा हुआ और इसी बात ने ट्रेड मार्क्स एक्ट की धारा 34 के तहत पहले इस्तेमाल करने वाले के अधिकार वाले उनके दावे को कमजोर किया।
कोर्ट ने कहा- सिर्फ सुनने में एक जैसा
वहीं धोखे से समानता के आरोप को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि हालांकि 'गौनाइल' और 'गोनाइल' सुनने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन विवादित मार्क का मूल्यांकन पूरे तौर पर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास के प्रोडक्ट में जाने-माने ब्रांड 'पतंजलि' का इस्तेमाल प्रमुख और स्पष्ट रूप से होता है, जो कि इसकी पहचान को बताता है। ऐसे में सामान्य बुद्धि और कमजोर याददाश्त वाले औसत उपभोक्ता को भ्रमित करने की संभावना नहीं बचती है।
फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास ने दिसंबर 2015 में होली काउ फाउंडेशन के आवेदन करने से पहले ही अगस्त 2015 में विवादित मार्क के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था। ऐसे में कोर्ट ने बताया कि केवल आवेदन की तारीखों के आधार पर भी प्रतिवादियों को प्राथमिकता मिल गई, साथ ही यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता ने उस वक्त रजिस्ट्रेशन का विरोध नहीं किया।
हाई कोर्ट ने कहा कि 'पतंजलि गोनाइल फ्लोर क्लीनर' का रजिस्ट्रेशन धोखा या भ्रम पैदा नहीं करता है। ऐसे में याचिकाकर्ता की सुधार याचिका खारिज कर दी गई, और ट्रेडमार्क को रजिस्टर में बने रहने का निर्देश दिया गया।
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