विनेश फोगाट को झटका, हाई कोर्ट ने ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति देने से किया इनकार
जुलाई 2025 में मां बनीं फोगाट ने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद रेसलिंग करियर फिर से शुरू करने के लिए, उन्हें कॉम्पिटिटिव रास्ते में फिर से शामिल होना पड़ा, जबकि गर्भावस्था के कारण वे जिस समय कॉम्पिटिशन में हिस्सा नहीं ले पाई थीं, उसके लिए कोई रियायत नहीं दी गई।

रिपोर्ट- हेमलता कौशिक
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को पहलवान विनेश फोगाट को एक झटका देते हुए उन्हें 2026 सीनियर विश्व चैंपियनशिप के लिए होने वाले महिलाओं के सिलेक्शन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस बारे में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने देर रात जारी अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि इस स्तर पर अदालत फोगाट को 14 सितंबर को होने वाले चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति देने के लिए पात्रता मानदंड में अंतरिम छूट देने के पक्ष में नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि सिलेक्शन के नियम सभी एथलीटों पर एक जैसे लागू होते हैं। अगर फोगाट को प्रोविजनल तौर पर हिस्सा लेने की इजाजत दी जाती है, तो असल में यह बाकी सभी एथलीटों पर लागू होने वाले एलिजिबिलिटी नियमों में उनके लिए एक अपवाद बनाने जैसा होगा।
'सभी पर लागू होंगे सर्कुलर में बताए गए नियम'
सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा की पीठ ने कहा कि 'हम दोहरा रहे हैं कि 7 सितंबर 2026 के सर्कुलर में बताए गए निर्धारित मानदंड सभी एथलीटों पर समान रूप से लागू होते हैं। कोई खिलाड़ी जिसने किसी भी कारण से निर्धारित प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लिया है, वह प्रतिवादी संख्या 1 यानी WFI (भारतीय कुश्ती महासंघ) द्वारा निर्धारित पात्रता श्रेणियों में नहीं आएगा।'
मैटरनिटी लीव के बाद सीधे ट्रायल में एंट्री चाहती थीं विनेश
उच्च न्यायालय ने यह आदेश पहलवान फोगाट की उस याचिका को खारिज करते हुए दिया जिसमें उन्होंने मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) से लौटने की बात बताते हुए अदालत से 2026 सीनियर विश्व चैंपियनशिप के महिला चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी थी।
'पात्रता मानदंड के विपरीत चयन ट्रायल में हिस्सा नहीं लेने दे सकते'
कोर्ट ने कहा कि सरकारी नीति (पॉलिसी) की वैधता की जांच करते समय फोगाट की गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और प्रसव के बाद स्वास्थ्य लाभ (रिकवरी) से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार करने की जरूरत होगी। हालांकि, अंतरिम चरण में केवल इन परिस्थितियों के आधार पर उन्हें पात्रता मानदंड के विपरीत चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
'समान परिस्थितियों वाले खिलाड़ियों के साथ होगा असमान व्यवहार'
पीठ ने कहा कि नीति की वैधता पर पहले फैसला किए बिना केवल याचिकाकर्ता को ऐसी अंतरिम राहत देना उन समान परिस्थितियों वाले खिलाड़ियों के साथ असमान व्यवहार बन सकता है जो इस अदालत के सामने नहीं हैं। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने सर्कुलर की वैधता या लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाही के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है। फिलहाल अंतरिम राहत देने के पक्ष में नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि सर्कुलर की वैधता या लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाही की मेरिट पर कोई अंतिम राय दिए बिना, वह अंतरिम राहत देने के पक्ष में नहीं है।
फोगाट ने लंबित मुख्य याचिका में दायर अपने आवेदन के जरिए 7 सितंबर को WFI द्वारा जारी उस सर्कुलर पर रोक लगाने की भी मांग की थी, जिसमें सिलेक्शन ट्रायल के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया तय किए गए थे। ये ट्रायल 14 सितंबर को यहां इंदिरा गांधी स्टेडियम में होने हैं।
प्रेग्नेंसी के बाद खेल में वापसी करने वाली एथलीटों के लिए व्यवस्था तैयार करने की मांग
यह नया आवेदन उस मुख्य याचिका में दायर किया गया था, जिसमें फोगाट ने गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद प्रतिस्पर्धी खेलों में लौटने वाली महिला एथलीटों के लिए निष्पक्ष और व्यवस्थित व्यवस्था बनाने की मांग की है। अपने आवेदन में उन्होंने उस सर्कुलर पर रोक लगाने की मांग की है, क्योंकि इसके चलते वह कजाकिस्तान के अस्ताना में 24 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होने वाली चैंपियनशिप के लिए सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा नहीं ले पा रही हैं।
विनेश बोलीं- मुझे किसी तरह की रियायत तक नहीं दी
फोगाट ने WFI के सिलेक्शन प्रोसेस को इस आधार पर चुनौती दी थी कि प्रेग्नेंसी, बच्चे के जन्म और उसके बाद रिकवरी के समय कॉम्पिटिटिव रेसलिंग से दूर रहने के कारण उन्हें 24 अक्टूबर से शुरू होने वाली चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से बाहर कर दिया गया था। हालांकि, WFI ने इस बात का खंडन किया कि फोगाट को हिस्सा लेने से रोका गया था। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि उन पर कोई बैन नहीं लगाया गया था और सिलेक्शन प्रोसेस से गुजरने से पहले वह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कॉम्पिटिशन के लिए एलिजिबल थीं।


