
मनीष सिसोदिया को हाईकोर्ट से गुड न्यूज, निर्वाचन को चुनौती वाली याचिका खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट से AAP नेता मनीष सिसोदिया को गुड न्यूज मिली है। अदालत ने पटपड़गंज से सिसोदिया की जीत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। क्या था पूरा मामला? इस रिपोर्ट में जानें…
दिल्ली हाईकोर्ट से मनीष सिसोदिया को अच्छी खबर मिली है। अदालत ने पटपड़गंज से मनीष सिसोदिया की जीत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार प्रताप चंद्र ने आरोप लगाया था कि सिसोदिया ने चुनावी नियमों का उल्लंघन किया और अपने नामांकन पत्र में एक पुरानी एफआईआर की जानकारी छुपाई। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता आरोपों के समर्थन में कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाया।
सबूत देने में नाकाम रहे
दिल्ली हाई कोर्ट के जज जसमीत सिंह ने कहा कि सिसोदिया के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले प्रताप चंद्र अपनी याचिका में दिए गए आरोपों के पक्ष में कोई ठोस वजह बताने और सबूत देने में नाकाम रहे हैं। मनीष सिसोदिया ने पटपड़गंज सीट पर 70,163 वोट पाकर जीत हासिल की थी जबकि प्रताप चंद्र को महज 95 वोट मिले थे।
क्या लगाए थे आरोप?
प्रताप चंद्र ने कोर्ट में दलील दी कि उन्होंने चुनाव नियमों का पालन करते हुए दो दिन पहले प्रचार रोक दिया था लेकिन दूसरे उम्मीदवारों ने मतदान के दिन तक प्रचार जारी रखा। उनका आरोप था कि इससे चुनाव की निष्पक्षता खत्म हो गई और उन्हें बराबरी का मौका नहीं मिला। उन्होंने यह दावा भी किया कि मनीष सिसोदिया ने अपने नामांकन पत्र में साल 2013 में दर्ज हुई एक FIR की जानकारी नहीं दी थी जो राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी।
क्या बोली अदालत?
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि याचिकाकर्ता ने केवल सामान्य आरोप लगाए हैं। वह आरोपों के पक्ष में जरूरी तथ्यों को पेश नहीं कर पाए जो कानूनी रूप से चुनाव याचिका के लिए जरूरी होते हैं। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि मतदान से पहले साइलेंस पीरियड के दौरान प्रचार ना करने के नियम के उल्लंघन का आरोप लगाने के लिए जो तस्वीरें दी गई हैं उनमें केवल पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम वाले सामान्य होर्डिंग दिख रहे हैं और उनमें मनीष सिसोदिया का कहीं कोई जिक्र नहीं है।
नहीं मानी याचिकाकर्ता की दलील
साथ ही अदालत ने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता साबित नहीं कर पाया कि होर्डिंग सिसोदिया की जानकारी या अनुमति से लगाए गए थे। यह दलील कि उक्त होर्डिंग जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-126 के तहत चुनाव प्रचार के समान हैं। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अदालत ने अपने फैसले से साफ कर दिया कि इस तरह के सामान्य होर्डिंग्स को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-126 के तहत प्रचार करने के तौर पर नहीं लिया जा सकता है।





