
14 महीनों से हिरासत में कैद सेलिना जेटली के भाई के लिए नियुक्त करें लीगल फर्म; HC का MEA को निर्देश
जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने सेलिना जेटली की याचिका पर निर्देश जारी किया। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर आदेश जारी करने में कोई रुकावट है, तो उसे एफिडेविट में बताएं। इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी।
बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई और रिटायर्ड मेजर विक्रांत जेटली जो कि पिछले 14 महीनों से UAE (संयुक्त अरब अमीरात) में हिरासत में हैं, उनसे जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया कि वह मेजर विक्रांत का पक्ष रखने के लिए एक कानूनी फर्म की नियुक्ति का आदेश जारी करे। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने कानूनी फर्म 'अल मारी पार्टनर्स' को दुबई और अबू धाबी में मेजर विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त करने का निर्देश दिया है।
इस फर्म का नाम सेलिना जेटली के वकील राघव काकर ने अदालत को सुझाया था, जिसमें एडवोकेट माधव अग्रवाल और सुराधीश वत्स ने उनकी मदद की। उन्होंने बताया कि यह कानूनी फर्म मेजर विक्रांत का केस पूरी तरह मुफ्त (प्रो-बोनो) में लड़ने के लिए तैयार है। साथ ही सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि यदि इस आदेश को जारी करने में कोई कानूनी बाधा है, तो विदेश मंत्रालय उसे हलफनामे के जरिए स्पष्ट करे।
हालांकि सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय के वकील ने इन दलीलों का विरोध किया। मंत्रालय का तर्क था कि विक्रांत जेटली ने दूतावास के अधिकारियों से कहा था कि लीगल फर्म नियुक्त करने का फैसला उनकी पत्नी चारू जेटली करेंगी। उधर सेलिना जेटली के वकील ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मंत्रालय तथ्यों को छिपा रहा है। वकील ने दलील दी कि विक्रांत अपनी पत्नी से बात तक नहीं करना चाहते। इस पर अदालत ने टिप्पणी की, 'जब फर्म बिना किसी खर्च के प्रतिनिधित्व के लिए तैयार है, तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि नाम पिता, माता या बहन द्वारा सुझाया गया है।'
क्या है पूरा मामला?
एक्ट्रेस की याचिका में दावा किया गया था कि उनके भाई मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत जेटली को सितंबर 2024 से UAE में गैर-कानूनी तरीके से अगवा करके हिरासत में रखा गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार उनके भाई के स्वास्थ्य या कानूनी स्थिति के बारे में बुनियादी जानकारी तक हासिल नहीं कर पाई है।
इससे पहले 3 नवंबर 2025 को कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को विक्रांत को कानूनी सहायता देने, भाई-बहन के बीच बातचीत को आसान बनाने और इस मामले के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को होगी।
MEA के वकील ने इन दलीलों का विरोध किया। यह कहा गया कि फर्म का नाम विक्रांत जेटली द्वारा सुझाई गई चार लीगल फर्मों की लिस्ट में शामिल है। यह भी कहा गया कि विक्रांत जेटली ने दूतावास के अधिकारियों से कहा था कि लीगल फर्म को नियुक्त करने का फैसला उनकी पत्नी, चारू जेटली करेंगी।





