MCD अधिकारी की गलत रिपोर्ट ने निगल लीं 23 जिंदगियां, एक दिन पहले ही की थी होटल की जांच

हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्ली
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दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी की लापरवाही 23 जिंदगियों पर भारी पड़ी। हौज रानी के बीएंडबी में आग की घटना से ठीक एक दिन पहले इस अधिकारी ने उसकी जांच की थी। आरोप है कि इस अधिकारी ने सतही जांच की और कमियों को नजरअंदाज किया। उन्होंने गलत रिपोर्ट दाखिल किया। एमसीडी ने इस अधिकारी की सेवा खत्म कर दी है।

MCD अधिकारी की गलत रिपोर्ट ने निगल लीं 23 जिंदगियां, एक दिन पहले ही की थी होटल की जांच

एक अधिकारी की लापरवाही किस कदर लोगों के लिए जानलेवा साबित होती है, इसका उदाहरण दिल्ली के एक होटल में लगी आग के बाद सामने आया है। दिल्ली नगर निगम ने गुरुवार को उस हेल्थ अधिकारी की सेवाएं समाप्त कर दीं, जिसने आग लगने की घटना से एक दिन पहले हौज रानी के बेड-एंड-ब्रेकफास्ट (B&B) का निरीक्षण किया था। इस घटना में 23 लोगों की मौत हो गई थी। आरोप है कि इस अधिकारी ने सतही निरीक्षण किया और कमियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। उन्होंने गलत और गुमराह करने वाली रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस की सिफारिश की।

कमियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया

इसके अलावा एमसीडी ने साउथ जोन के डिप्टी हेल्थ ऑफिसर का भी तबादला कर दिया। उन्हें प्रशासनिक कारणों से मुख्यालय से अटैच कर दिया। एमसीडी के 11 जून के ऑफिस ऑर्डर में कहा गया है कि असिस्टेंट पब्लिक हेल्थ इंस्पेक्टर प्रिंस मान को उस इलाके में काम सौंपा गया था। उन्होंने साफ-साफ दिख रही कमियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। 2 जून, 2026 को उन्होंने कथित तौर पर उस जगह का फील्ड निरीक्षण किया था। यह बहुत ही सतही और लापरवाही भरे तरीके से किया गया पाया गया है।

गुमराह करने वाली निरीक्षण रिपोर्ट

उन्होंने कार्यालय में जमा किए गए अपने दस्तावेजों और जमीनी हकीकत में साफ दिख रही कमियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया, जबकि वहां नियमों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा था। उन्होंने गलत और गुमराह करने वाली निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर उस जगह के लिए लाइसेंस देने की सिफारिश की। इसलिए उनका अपने पद पर बने रहना जनहित के लिए नुकसानदेह है। एचटी ने पहले रिपोर्ट किया था कि 'फ्लोरिश स्टे B&B' के ग्राउंड फ्लोर पर चल रहे 'स्नैक्स एंड बाइट्स' को सिर्फ चाय और स्नैक की दुकान चलाने की इजाजत थी, लेकिन वह एक पूरे रेस्टोरेंट की तरह चल रहा था।

सिर्फ चाय और स्नैक्स की इजाजत थी

नाम नहीं छापने की शर्त पर एमसीडी अधिकारियों ने कहा कि इस हादसे से एक दिन पहले ही उस जगह का निरीक्षण किया गया था और उसे मंजूरी दी गई थी। एमसीडी की शुरुआती जांच में इलाके के इंस्पेक्टर को दोषी ठहराया गया है। उन्होंने मार्च 2026 में जमा किए गए हेल्थ ट्रेड लाइसेंस के आवेदन पर कार्रवाई में 78 दिनों की देरी की थी। चाय और स्नैक्स का लाइसेंस आम तौर पर उन छोटी दुकानों के लिए होता है जो पहले से पकी हुई चीजें बेचती हैं। वहां खाना गर्म करने और बैठने की सुविधा सीमित होती है। 4 जून को दिल्ली पुलिस ने बताया कि उन्हें उस जगह पर चार गैस सिलेंडर मिले थे।

6 कमरे की जगह 25 कमरे बना लिए थे

जांचकर्ताओं ने पहले बताया था कि B&B को सिर्फ छह कमरे चलाने की इजाजत थी, लेकिन वहां चार मंजिल, एक बेसमेंट और छत पर कम से कम 25 कमरे थे। वहां आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था।

5 जून को एचटी ने रिपोर्ट किया कि मालिक लवकेश बजाज के पास पूरी तरह से रेस्टोरेंट चलाने का लाइसेंस नहीं था। उनके पास केवल चाय और स्नैक्स आउटलेट का लाइसेंस था, जिसमें खाना पकाने या बैठने की जगह की इजाजत नहीं थी। यह लाइसेंस भी इस साल 31 मार्च को खत्म हो गया था। बजाज ने आग लगने की घटना की जानकारी मिलने के कुछ घंटे बाद ही लाइसेंस रिन्यूअल के लिए आवेदन किया था। बाद में उनका आवेदन रद्द कर दिया गया।

जोनल डिप्टी हेल्थ ऑफिसर का भी ट्रांसफर

एमसीडी के एक दूसरे आदेश में साउथ जोन के इंचार्ज जोनल डिप्टी हेल्थ ऑफिसर का ट्रांसफर कर दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि डॉ. संजय सिन्हा का साउथ जोन के डिप्टी हेल्थ ऑफिसर के पद से तुरंत प्रभाव से ट्रांसफर किया जाता है और उन्हें पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट से अटैच किया जाता है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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