बच्चों की तस्करी के लिए 'मंडी' बनी दिल्ली, 2 घंटे घूम लीजिए सच पता चल जाएगा; क्यों फूटा HC का गुस्सा
बेंच ने कहा कि न्यायिक आदेशों के बावजूद बच्चों की तस्करी जैसा गलत काम बेरोकटोक जारी है। इसके बाद बेंच ने NCPCR से इस बारे में जरूरी डेटा उपलब्ध कराने को कहा, ताकि इस मामले में उचित निर्देश जारी किए जा सकें।

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को रेलवे स्टेशनों पर बच्चों की तस्करी से जुड़े मामले को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई की और इस दौरान बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी बच्चों की तस्करी के लिए 'मंडी' बन गई है। इस जनहित याचिका में रेलवे स्टेशनों और आस-पास के इलाकों में खुलेआम हो रही बच्चों की तस्करी को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली सरकार, रेलवे, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब भी मांगा। बेंच ने कहा कि न्यायिक आदेशों के बावजूद बच्चों की तस्करी जैसा गलत काम बेरोकटोक जारी है।
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई की और नोटिस जारी करते हुए कहा कि याचिका एक गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है, जिसमें कहा गया है कि रेलवे स्टेशनों व आस-पास के इलाकों में बच्चों की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। पीठ द्वारा पहले भी बार-बार चिंता जताए जाने के बावजूद यह जारी है। इस याचिका को 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस व एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन' नाम के NGO ने दायर किया है।
'स्टेशन के आसपास घूमने से सच दिख जाएगा'
सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की, 'दिल्ली अब बच्चों की तस्करी की मंडी बन गई है और इस बात की पुष्टि के लिए आपको याचिका पढ़ने की भी जरूरत नहीं है। केवल रेलवे स्टेशनों के आसपास दो घंटे घूमकर देख लीजिए। सच पता चल जाएगा' कोर्ट ने कहा, 'यह आम जानकारी में है कि कम उम्र के बच्चों की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। जिस पर कोर्ट ने समय-समय पर चिंता भी जताई है और निर्देश भी जारी किए हैं। इसके बावजूद, यह बुराई बेरोकटोक जारी है।
'सही कार्रवाई नहीं होने से बच्चों का पुनर्वास नहीं हो पाता'
कोर्ट ने कहा कि हालांकि अधिकारियों ने तस्करी पर रोक लगाने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन प्रभावी ढंग से लागू न होने के कारण स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। याचिका में भी बताया गया है कि पुनर्वास में अधिकारियों की गंभीर गलतियों की वजह से जनहित याचिका दाखिल की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सही कार्रवाई न होने की वजह से कई बच्चों का सुरक्षित पुनर्वास नहीं हो पा रहा। इसके बजाय उन्हें तस्करों को लौटा दिया जा रहा है।
'बचाई गई लड़की को वापस तस्करों के हवाले कर दिया गया था'
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रभसहाय कौर ने एक खास घटना का जिक्र भी किया, जिसमें आनंद विहार रेलवे स्टेशन से बचाई गई एक लड़की को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करने के बजाय, वापस तस्करों के हवाले कर दिया गया था। बाद में एक छापे के दौरान वह उसी रेलवे स्टेशन पर फिर से काम करती हुई पाई गई थी।
मुख्य न्यायाधीश ने हालात पर जताई चिंता
हालात पर चिंता जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली सरकार के वकील से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछा। पीठ ने कहा कि इस समस्या की गंभीरता को कोई भी व्यक्ति देख सकता है जो थोड़े समय के लिए रेलवे स्टेशन जाता है। लेकिन संबंधित अधिकारियों को यह अपराध नजर नहीं आ रहा है।
सुनवाई के बाद बेंच ने NCPCR से इस बारे में जरूरी डेटा उपलब्ध कराने को कहा, ताकि इस मामले में उचित निर्देश जारी किए जा सकें। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को तय करते हुए, बेंच ने NCPCR से अपने सुझाव भी देने को कहा।
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