अब दिल्ली में सड़कों के गड्ढे स्प्रे करके भरें जाएंगे! जानें यह तकनीक कैसे काम करती है?
Spray Injection Road Patching: दिल्ली सरकार ने सड़क के गड्ढों की मरम्मत के लिए 'स्प्रे इंजेक्शन रोड पैचिंग' तकनीक का ट्रायल शुरू किया है। इस तकनीक से बारिश के दौरान भी 2 से 5 मिनट में गड्ढे भरे जा सकेंगे और मरम्मत के तुरंत बाद सड़क को ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। जानिए कैसे काम करेगी यह तकनीक।

Spray Injection Road Patching: राजधानी दिल्ली में सड़क पर बने गड्ढों की समस्या से जल्द राहत मिल सकती है। दिल्ली सरकार ने गड्ढों की मरम्मत के लिए नई 'स्प्रे इंजेक्शन रोड पैचिंग' (Spray Injection Road Patching) तकनीक का ट्रायल शुरू किया है। सरकार का दावा है कि इस तकनीक की मदद से बारिश के मौसम में भी सड़क के गड्ढों को कुछ ही मिनटों में भरा जा सकेगा और मरम्मत के तुरंत बाद सड़क को यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने मंगलवार को इस तकनीक का ट्रायल देखा। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह मशीन आधारित प्रणाली है, जिससे कम समय में मजबूत और टिकाऊ मरम्मत की जा सकती है। साथ ही, सड़क मरम्मत के दौरान ट्रैफिक पर भी कम असर पड़ेगा।
कैसे काम करेगी नई तकनीक?
अधिकारियों के मुताबिक, स्प्रे इंजेक्शन रोड पैचिंग पूरी तरह एक मशीन के जरिए होने वाली तकनीक है।
- सबसे पहले मशीन तेज हवा (हाई-वेलोसिटी एयर) से गड्ढे को साफ करती है, ताकि धूल और ढीला मलबा हट जाए।
- इसके बाद गड्ढे की सतह पर बिटुमेन इमल्शन (Bitumen Emulsion) की एक परत डाली जाती है, जिससे भराव सामग्री अच्छी तरह चिपक सके।
- इसके बाद मशीन बिटुमेन इमल्शन से लेपित एग्रीगेट (पत्थर के छोटे टुकड़े) को तेज दबाव के साथ गड्ढे में भरती है।
- इससे मसाला वाली सामग्री खुद ही दबकर ठोस (कॉम्पैक्ट) हो जाती है, इसलिए अलग से रोलर चलाने की जरूरत नहीं पड़ती।
2 से 5 मिनट में भर जाएगा गड्ढा
सरकार के मुताबिक, इस तकनीक से एक गड्ढे की मरम्मत में केवल 2 से 5 मिनट का समय लगेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि मरम्मत पूरी होते ही सड़क को तुरंत यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि इस तकनीक से भरे गए गड्ढे पारंपरिक कोल्ड मिक्स पैचिंग की तुलना में अधिक समय तक टिकेंगे। जहां कोल्ड मिक्स से की गई मरम्मत अक्सर कुछ हफ्तों में खराब हो जाती है, वहीं स्प्रे इंजेक्शन तकनीक से की गई मरम्मत कई वर्षों तक चल सकती है।
मानसून में मिलेगी राहत
दिल्ली सरकार का मानना है कि मानसून के दौरान गड्ढों की समस्या सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में यह तकनीक बारिश के दौरान भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है और सड़कों को सुरक्षित तथा सुगम बनाए रखने में मदद करेगी। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में इस तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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