
यमुना से गाद निकालने के लिए एनजीटी जाएगी दिल्ली सरकार, क्या तैयारी?
यमुना नदी की जल ग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए रेखा गुप्ता सरकार दिल्ली में यमुना नदी की गाद निकालने (ड्रेजिंग) की योजना बना रही है। बता दें कि मौजूदा वक्त में यमुना नदी की ड्रेजिंग की अनुमति नहीं है।
यमुना में पानी की क्षमता को बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार इसके भीतर से गाद निकालने (ड्रेजिंग) की योजना बना रही है। इसके लिए सरकार एनजीटी से अनुमति मांगने की तैयारी कर रही है। दरअसल एनजीटी ने वर्ष 2015 में यमुना से बालू खनन पर रोक लगा रखा है। ऐसे में अगर सरकार को गाद भी निकालनी है तो उसके लिए एनजीटी की अनुमति अनिवार्य है। क्योंकि गाद के साथ बालू भी बाहर निकल सकती है।
सरकार का मानना है कि गाद निकलने से यमुना में पानी की क्षमता बढ़ेगी और भविष्य में बाढ़ जैसा खतरा नहीं होगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ड्रेजिंग सामान्य तौर पर जलाशयों के भीतर मौजूद गाद एवं कचरा निकालने के लिए की जाती है। इस प्रक्रिया के माध्यम से वर्षों से जमा गाद एवं कचरा बाहर निकाल लिया जाता है। ऐसा करने से जलाशय में जल संचयन की क्षमता बढ़ती है।
हाल ही में यमुना का जलस्तर बढ़ने से पानी सड़कों तक आ गया था। यह समस्या इसलिए आई क्योंकि यमुना में पानी रखने की क्षमता गाद के चलते लगातार घटती जा रही है। यमुना में ड्रेजिंग की अनुमति नहीं है।
साल 2015 में ही एनजीटी ने यमुना से किसी भी प्रकार के खनन पर रोक लगा दी थी। लेकिन दिल्ली सरकार इस समस्या का समाधान करने के लिए एनजीटी से संपर्क करेगी। सूत्रों ने बताया कि यमुना का केवल दो फीसदी हिस्सा दिल्ली में है। लेकिन यमुना के प्रदूषण में दिल्ली की हिस्सेदारी 76 फीसदी है। दिल्ली में यमुना की कुल लंबाई 52 किलोमीटर है।
इसमें से वजीराबाद से ओखला तक 22 किलोमीटर का हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित रहता है और इस जगह के प्रदूषण को दूर करने के लिए ही अधिकांश योजनाएं बनाई जाती हैं। कुछ समय पूर्व दिल्ली जल बोर्ड ने वजीराबाद तालाब से गाद निकालने की बात कही थी, लेकिन मानसून आने के चलते यह संभव नहीं हो सका। अधिकारियों का कहना है कि वजीराबाद तालाब से गाद निकालने के लिए टेंडर किया जा चुका है।





