काम की बात: दिल्ली सरकार ला रही ड्रोन पॉलिसी, इन कामों में होंगे इस्तेमाल; निवेश संग नई नौकरियां भी
Delhi Drone Policy : दिल्ली सरकार जल्द ही एक ड्रोन पॉलिसी लाने जा रही है। इस पॉलिसी का ड्राफ्ट भी तैयार हो गया है। इस पॉलिसी का मकसद अतिक्रमण पर नजर रखने से लेकर महिलाओं की सुरक्षा सहित कई कामों के लिए ड्रोन तैनात करना है।

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार जल्द ही एक ड्रोन पॉलिसी लाने जा रही है। इससे न सिर्फ निवेश आएगा, बल्कि नई नौकरियां भी पैदा होंगी। ड्रोन पॉलिसी के ड्राफ्ट के मुताबिक, राजधानी में जल्द ही खुले में आग जलाने और कंस्ट्रक्शन से उड़ने वाली धूल का पता लगाने, यमुना के किनारे कचरा फेंकने और अतिक्रमण पर नजर रखने, महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशील इलाकों की निगरानी करने और इमरजेंसी कॉल पर तेजी से मदद पहुंचाने के लिए ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं।
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने ड्रोन पॉलिसी का यह ड्राफ्ट तैयार किया है। इसमें 2026-27 से 2030-31 के दौरान ड्रोन इकोसिस्टम बनाने के लिए करीब ₹85 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। इस इकोसिस्टम में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, ट्रेनिंग, टेस्टिंग और सरकार के नेतृत्व में ड्रोन का इस्तेमाल शामिल होगा। इस पॉलिसी में अगले पांच वर्षों में 25 से अधिक ड्रोन कंपनियां बनाने, कम से कम 5000 लोगों को ट्रेनिंग देने और 1000 से अधिक नौकरियां पैदा करने का भी लक्ष्य भी शामिल है।
दिल्ली सरकार को उम्मीद है कि इस पॉलिसी से ड्रोन और उससे जुड़ी गतिविधियों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आएगा और 250 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व भी हासिल होगा।
निगरानी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को बेहतर बनाएंगे ड्रोन
दिल्ली पुलिस और गृह विभाग संवेदनशील और ज्यादा भीड़-भाड़ वाले इलाकों की निगरानी, स्थिति का जायजा लेने और आपातकालीन स्थिति में कार्रवाई के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस पॉलिसी में वायु प्रदूषण के हॉटस्पॉट, इंडस्ट्री से निकलने वाले धुएं, कंस्ट्रक्शन की धूल और खुले में कचरा जलाने जैसे कामों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा यह ड्रोन यमुना के लिए प्रदूषण के स्रोतों, कचरा फेंकने, अतिक्रमण और नदी की स्थिति में बदलावों की पहचान कर सकते हैं। वहीं, नगर निकाय कचरा जमा होने स्थानों, लैंडफिल साइट्स और सफाई के कामों की निगरानी के लिए इन्हें तैनात कर सकते हैं।
सरकार रेगुलेटरी नियमों का पालन करते हुए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए ड्रोन फ्लाइट-टेस्टिंग के लिए खास साइट्स बनाने की भी योजना बना रही है। इसमें कम से कम 10 रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन, कई स्किलिंग सेंटर और एकेडमिक व टेक्निकल संस्थानों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का प्रस्ताव है।
स्किलिंग और रिसर्च के लिए मदद का प्रस्ताव
इस पॉलिसी में हर ट्रेनी को ट्रेनिंग फीस में 50% तक सहायता (अधिकतम 5,000 रुपये तक) और सरकारी संस्थानों में ट्रेनिंग लेने वालों के लिए 5000 रुपये का स्टाइपेंड देने का प्रस्ताव है। इसमें खास रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए 20 लाख रुपये तक की ग्रांट और 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाने के लिए भी 20 लाख रुपये तक की ग्रांट देने का प्रावधान है।
इस पॉलिसी में ड्रोन के लिए कोई अलग रेगुलेटरी सिस्टम बनाने की योजना नहीं है। सभी ऑपरेशन सेंट्रल रेगुलेशन (जैसे ड्रोन रूल्स, 2021) और संबंधित अधिकारियों के निर्देशों के तहत ही चलेंगे।
यह ड्राफ्ट पॉलिसी 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी, जब तक कि सरकार इसमें कोई बदलाव न करे; इसे वापस न ले या इसकी अवधि न बढ़ाए।
पॉलिसी का मकसद ड्रोन सेक्टर में नौकरियां पैदा करना
ड्राफ्ट में कई सेगमेंट में नौकरियां पैदा करने में मदद का प्रस्ताव है, जिनमें ड्रोन ऑपरेशन, मैन्युफैक्चरिंग, मेंटेनेंस, डेटा एनालिटिक्स और सर्विस डिलीवरी शामिल हैं।
सितंबर आखिर तक जनता के सामने आएगी पॉलिसी
दिल्ली के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पंकज सिंह ने एचटी को बताया, "कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद हम इस महीने के आखिर तक इस पॉलिसी को जनता के सामने लाने की योजना बना रहे हैं।"
उन्होंने बताया कि सरकार सबसे पहले इस पॉलिसी पर जनता की राय जानने के लिए इसे सार्वजनिक करेगी। लोगों की राय का विश्लेषण करने के बाद पॉलिसी की दोबारा समीक्षा की जाएगी और इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा और फिर एलजी तरनजीत सिंह संधू की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
क्यों लाई जा रही ड्रोन पॉलिसी
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले साल नवंबर में लाल किले के पास हुए एक घातक बम ब्लास्ट के बाद पूर्व उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने दिल्ली के मुख्य सचिव को तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश की ड्रोन पॉलिसी को दिल्ली में भी लागू करने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया था।


