काम की बात: आग से बचाव पर दिल्ली सरकार का बड़ा प्लान, हर घर में करना होगा इंतजाम

नई दिल्ली, पीटीआई
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राजधानी में हुए 3 भीषण अग्निकांडों को देखते हुए दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार 15 मीटर से कम ऊंचे घरों और बिल्डिंगों के लिए आग से सुरक्षा के उपाय अनिवार्य कर सकती है। पहले पालम और फिर विवेक विहार अब मालवीय नगर के हादसे ने सरकार को इस नियम पर विचार करने को विवश कर दिया है।

आग से बचाव पर दिल्ली सरकार का बड़ा प्लान, हर घर में करना होगा इंतजाम

दिल्ली सरकार कम ऊंचाई वाली रिहायशी इमारतों में स्मोक डिटेक्टर और फायर एक्सटिंग्विशर जैसे आग से सुरक्षा के उपाय अनिवार्य करने के लिए नियम बनाने पर विचार कर रही है। यह कदम हाल ही में मालवीय नगर, विवेक विहार और पालम में आग लगने की उन घटनाओं के बाद उठाया जा रहा है, जिनमें कई लोगों की जान चली गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि सरकार खास तौर पर 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली रिहायशी इमारतों में आग से सुरक्षा के उपाय अनिवार्य करने की सिफारिश पर गंभीरता से विचार कर रही है। मौजूदा नियमों के तहत ऐसी इमारतों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती है।

फिलहाल, हाइड्रेंट, एक्सटिंग्विशर और स्मोक डिटेक्टर जैसे फायर सेफ्टी उपकरण मुख्य रूप से ऊंची इमारतों और ऐसी संरचनाओं में अनिवार्य हैं, जिनके लिए फायर एनओसी की जरूरत होती है।

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली फायर सर्विस ने भी सभी घरों में स्मोक डिटेक्टर और एक्सटिंग्विशर अनिवार्य करने की सिफारिश की है और मौजूदा इमारतों में आग से सुरक्षा के बुनियादी उपकरण लगाने के लिए एक चरणबद्ध योजना का सुझाव दिया है।

पालम और विवेक विहार में रिहायशी इमारतों में लगी आग में 9 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक हफ्ते पहले मालवीय नगर के एक होटल में लगी आग में 23 लोगों की जान चली गई थी।

डीएफएस ने दिल्ली सरकार को भेजा ये प्रस्ताव

दिल्ली में एक महीने के भीतर आग लगने की दो विनाशकारी घटनाओं में 31 लोगों की जान जाने के बाद, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने सभी इमारतों में 'स्मोक डिटेक्टर' और 'स्प्रिंकलर सिस्टम' (पानी छिड़कने वाली प्रणाली) को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव दिया है। 'स्मोक डिटेक्टर' ऐसा सुरक्षा उपकरण है जो हवा में धुएं के कणों या आग के धुएं को महसूस करके अलार्म बजाता है। डीएफएस का कहना है कि इस कदम से आग का जल्द पता चलने और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से आग से होने वाली मौतों में 97 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। यह प्रस्ताव विवेक विहार में 3 मई को एक रिहायशी इमारत में आग लगने की घटना के बाद दिल्ली सरकार को सौंपा गया था। इस हादसे में दो परिवारों के 9 सदस्यों की मौत हो गई थी, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था। यह आग एयर-कंडीशनर (एसी) में कथित तौर पर हुए विस्फोट के कारण भड़की थी।

इस सिफारिश की अहमियत तब और बढ़ गई जब 3 जून को दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में आग लगने की एक और बड़ी घटना में 23 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 13 विदेशी नागरिक शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार, दोनों में से किसी भी इमारत में 'स्मोक डिटेक्टर' या 'स्प्रिंकलर सिस्टम' नहीं थे, जो शुरुआती चरण में ही वहां मौजूद लोगों को सतर्क कर देते या आग के घातक होने से पहले उसे काबू करने में मदद करते।

डीएफएस के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिलाष मलिक ने बताया कि "हर घर सुरक्षित, भारत विकसित" प्रस्ताव के तहत, दिल्ली की सभी इमारतों में 'स्मोक डिटेक्टर' लगाना आवश्यक होगा, जो लगभग 15 सेकेंड के भीतर धुएं का पता लगा सकते हैं। इसके साथ ही ऐसे 'स्प्रिंकलर सिस्टम' भी लगाने होंगे जो तापमान 68 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर सक्रिय हो जाते हैं।

मलिक ने कहा कि इसका उद्देश्य आग को उसके शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करना और लोगों को वहां से सुरक्षित बाहर निकलने के लिए महत्वपूर्ण समय प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक इमारतें वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) की कमी, एयर-कंडीशनर और सिंथेटिक सामग्रियों के अत्यधिक उपयोग और फर्श से छत की कम ऊंचाई जैसे कारकों के कारण आग के तेजी से फैलने के प्रति काफी संवेदनशील हो गई हैं।

मलिक ने कहा कि एक दशक पहले, किसी आग के ‘फ्लैशओवर’ चरण (जब पूरा कमरा आग की लपटों से घिर जाता है और बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है) तक पहुंचने का समय लगभग 15 से 17 मिनट था। आज, वह समय घटकर केवल तीन से पांच मिनट रह गया है।

दिल्ली में हर साल आग से होती हैं 100 मौतें

उन्होंने कहा कि दिल्ली में औसतन हर साल आग से करीब 100 मौतें दर्ज की जाती हैं और प्रस्तावित उपायों से इस संख्या को संभावित रूप से घटाकर सालाना लगभग तीन मौतों तक लाया जा सकता है।

तीन साल तक का समय दिया जाएगा समय

डीएफएस ने चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वयन योजना का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत नई इमारतों के लिए तुरंत इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा, जबकि मौजूदा ढांचों को इन प्रणालियों को स्थापित करने के लिए तीन साल तक का समय दिया जाएगा। प्रस्ताव में यह भी सिफारिश की गई है कि सरकार संपत्ति मालिकों में इसका अनुपालन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन, सब्सिडी और नीतिगत उपाय पेश करे। डीएफएस के अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में करीब 72 लाख इमारतें हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 10,000 इमारतों में ही 'स्मोक डिटेक्टर' और 'स्प्रिंकलर सिस्टम' लगे हुए हैं।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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