
दिल्ली सरकार ने की खराब परफॉरमेंस वाले 56 स्कूलों की पहचान; अब इनका क्या होगा?
दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में कक्षा-9 और कक्षा-11 में 60 फीसदी से कम उत्तीर्ण अंक वाले यानी खराब परफॉरमेंस देने वाले 56 स्कूलों की पहचान की है। अब इन खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों का क्या होगा?
दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में कक्षा-9 और कक्षा-11 में 60 फीसदी से कम उत्तीर्ण अंक वाले 56 स्कूलों की पहचान की है। अब इन खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों की ओर से 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए संरक्षक के तौर पर गोद लिया जाएगा। अधिकारी इन स्कूलों के लिए मेंटर का काम करेंगे। मंगलवार को जारी एक नोट में यह जानकारी दी गई।

अब ये स्कूल लिए जाएंगे गोद
इसमें कहा गया है कि राजधानी के सरकारी स्कूल का प्रदर्शन बेहतर करने के लिए अब शिक्षा अधिकारी इन स्कूलों को गोद लेंगे। शिक्षा विभाग ने यह विशेष पहल कक्षा 10वीं और 12वीं का परिणाम सुधारने के लिए शुरू की है। अधिकारी संबंधित स्कूलों का कम से कम पखवाड़े में एक बार दौरा करेंगे। अधिकारी देखेंगे कि स्कूलों में छात्रों को कैसे पढ़ाया जा रहा है।
क्या करेंगे गोद लेने वाले अधिकारी?
अधिकारी देखेंगे कि स्टूडेंट को शैक्षणिक सामग्री उन्हें मिल रही है या नहीं। किन-किन चीजों में सुधार किया करने की जरूरत है। अधिकारियों को निरीक्षण रिपोर्ट नियमित समय के अंदर शिक्षा विभाग को देनी होगी ताकि इस पर एक्शन प्लान भी तैयार किया जा सके। परिपत्र में आगे कहा गया है कि खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों का चुनाव 9वीं और 11वीं की परीक्षाओं में छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर किया गया।
हर पखवाड़े कम से कम एक बार करेंगे दौरा
जारी परिपत्र में कहा गया है कि अधिकारी नियमित निरीक्षण के जरिए शैक्षणिक प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए इन स्कूलों का मार्गदर्शन करेंगे। शिक्षा विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे हर पखवाड़े कम से कम एक बार अपने गोद लिए गए स्कूलों का दौरा करें। साथ ही अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि विभाग की ओर से मुहैया कराए गए फॉर्मेट के अनुसार उसी दिन अपनी निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
गणित पर रहेगा जोर
शिक्षा विभाग के मुताबिक, इन 56 स्कूलों में नौवीं और 11वीं कक्षा का पास प्रतिशत 50 फीसदी तक रहा है। अब इस सत्र 2025-26 में इन स्कूलों की छठी से दसवीं तक मिशन गणित और विशेष संवर्धन कक्षाओं पर जोर रहेगा। शिक्षकों को गणित को आनंददायक तरीके से पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अधिकारी शैक्षणिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ स्कूलों में प्रतियोगिताओं पर पैनी नजर रखेंगे।
(हिन्दुस्तान संवाददाता के इनपुट के साथ)



