
BS-4 से नीचे के वाहनों पर ऐक्शन ले सकती है दिल्ली सरकार, सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी
दिल्ली सरकार बीएस-4 (BS IV) मानकों से कम के वाहनों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी मंजूरी दे दी है। सर्वोच्च अदालत के इस आदेश का मकसद पर्यावरण की सुरक्षा और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को एनसीआर क्षेत्र में बीएस-4 (BS IV) मानकों से कम मानक वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के साथ बुधवार को साफ कर दिया कि दिल्ली की सड़कों पर अब केवल बीएस-4 मानक या उससे ऊपर की श्रेणी के वाहन ही दौड़ सकेंगे। सर्वोच्च अदालत के इस आदेश का मकसद पर्यावरण की सुरक्षा और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगाना है ताकि दिल्ली एनसीआर में हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके।
सर्वोच्च न्यायालय के इस नए आदेश के बाद अब अधिकारी उन पुराने वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर पाएंगे जो बीएस-4 मानकों को पूरा नहीं करते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उसके 12 अगस्त के उस पिछले आदेश में संशोधन करता है जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ओवरएज वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लगा दी गई थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की पीठ ने दिल्ली सरकार की उस याचिका पर यह स्पष्टीकरण जारी किया जिसमें शहर में बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए पुराने वाहनों पर कार्रवाई की अनुमति मांगी गई थी।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाई कि 12 अगस्त के आदेश में संशोधन किया जाए ताकि बीएस-3 तक के उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि पुराने वाहनों के उत्सर्जन मानक बहुत खराब हैं। ऐसे वाहन पलूशन बढ़ा रहे हैं। वायु प्रदूषण मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने भी इस दलील का समर्थन किया।
पीठ ने दलीलों को दर्ज करते हुए निर्देश दिया कि 12 अगस्त के आदेश को उस सीमा तक संशोधित किया जाता है कि उन वाहन मालिकों के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा जो बीएस-4 और उससे नए हैं, भले ही वे डीजल इंजन के मामले में दस साल और पेट्रोल इंजन के मामले में पंद्रह साल की एज लीमिट पार कर चुके हों।
उल्लेखनीय है कि 2015 में एनजीटी ने पलूशन पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के चलने पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। इसे 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। सर्वोच्च अदालत ने 12 अगस्त को इस मामले में एक नया आदेश पारित किया था। इसमें कहा गया था कि दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

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Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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