
दिल्ली के सरकारी स्कूलों की होगी डिजिटल मैपिंग, स्टूडेंट्स को मिलेंगे ये फायदे
सूद ने कहा है कि 'डिजिटल मैपिंग के साथ, हर काम के लिए डिजिटल प्रूफ की आवश्यकता होगी। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि वास्तव में काम कहां किया गया है और कहां नहीं। ऐसे में नई व्यवस्था से तथ्यों को छिपाने की संभावना काफी कम हो जाएगी।'
दिल्ली के सरकारी स्कूलों को जल्द ही डिजिटल मैपिंग के जरिए जोड़ा जाएगा। दिल्ली के एजुकेशन मिनिस्टर आशीष सूद ने ये जानकारी दी है। सूद के मुताबिक डिजिटल मैपिंग के जरिए सरकारी स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर, बिल्डिंग की स्थिति और कंस्ट्रक्शन के काम को रियल टाइम में मॉनिटर किया जा सकेगा। सूद के मुताबिक सभी सरकारी स्कूलों का डिजिटल मैपिंग के जरिए केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा जिससे पारदर्शिता तो आएगी ही साथ ही सिर्फ कागजों पर काम दिखाने की पुरानी चली आ रही व्यवस्था से छुटकारा मिलेगा।
सूद ने कहा है कि ‘डिजिटल मैपिंग के साथ, हर काम के लिए डिजिटल प्रूफ की आवश्यकता होगी। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि वास्तव में काम कहां किया गया है और कहां नहीं। ऐसे में नई व्यवस्था से तथ्यों को छिपाने की संभावना काफी कम हो जाएगी।’

किस तरह का डेटाबेस?
अबतक स्कूलों के कामकाज को कागजी फाइलों और मैनुअल रिपोर्टिंग के जरिए होते हैं। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक स्कूल की डिटेल डिजिटल प्रोफाइल तैयार होगी जिसमें बिल्डिंग, क्लासरूम, टॉयलेट, पेयजल की व्यवस्था, बिजली सप्लाई, लैब, लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, दिव्यांग छात्रों के रैंप, शौचालय और अन्य सुविधाओं की डिटेल होगी।
सफल रहा पायलट प्रोजेक्ट
दिल्ली सरकार केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के लिए एजेंसी को हायर करेगी इसके लिए जल्द टेंडर निकाला जाएगा। वहीं सरकार ने नरेला के एक सरकारी स्कूल में पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया था जिसके परिणाम काफी अच्छे रहे।





