दिल्ली में मंजूरी मिलने के 6 महीने बाद भी शुरू नहीं हो सका इस फ्लाईओवर का काम, अब सरकार ने DDA से लगाई गुहार
अधिकारियों ने साल 2016 में दक्षिणी दिल्ली के इस इलाके में दूसरे फ्लाईओवर की जरूरत को पहचाना था, और इसके बाद UTTIPEC ने फ्लाईओवर का एक बेसिक प्लान तैयार करके उसे मंजूरी भी दे दी गई थी।

दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग ने साउथ दिल्ली में सावित्री सिनेमा हाफ-फ्लाईओवर बनाने के लिए दिसंबर 2025 में मंजूरी दी थी। लेकिन छह महीने बाद भी इस प्रोजेक्ट पर अबतक काम शुरू नहीं हो सका है, दरअसल फ्लाईओवर बनाने के लिए सरकार को जमीन ही नहीं मिल सकी है, जिसकी वजह से यह काम अटका हुआ है। ऐसे में अब सरकार ने जमीन के लिए DDA यानी दिल्ली विकास प्राधिकरण से गुहार लगाई है।
इस बारे में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि राज्य सरकार ने फ्लाईओवर का निर्माण शुरू करने के लिए DDA से करीब दो एकड़ जमीन मांगी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार PWD ने पिछले साल दिसंबर में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, साथ ही मोदी मिल फ्लाईओवर को कालकाजी मंदिर रोड से जोड़ने का काम भी मंजूर किया था। लेकिन जमीन की कमी की वजह से काम शुरू नहीं हो सका।
जमीन की कमी की वजह से शुरू नहीं हो सका काम
एक अधिकारी ने इस मामले को लेकर कहा, 'प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद काम सौंप दिया गया था, लेकिन, इलाके में जगह की कमी के कारण अबतक काम शुरू नहीं हो सका। जिसके बाद हमने DDA से लगभग दो एकड़ जमीन मांगी है ताकि ट्रैफिक की आवाजाही में ज्यादा रुकावट के बिना निर्माण कार्य किया जा सके।'
58 करोड़ की लागत से यहां बनना है फ्लाईओवर
सरकार की योजना के अनुसार, सावित्री सिनेमा पर 58 करोड़ रुपए की लागत से दूसरा फ्लाईओवर बनना है, जो कि मौजूदा स्ट्रक्चर के समानांतर बनाया जाएगा। इस निर्माण से ग्रेटर कैलाश और नेहरू प्लेस, चितरंजन पार्क और चिराग दिल्ली इलाके के बीच बिना किसी परेशानी के आवाजाही हो सकेगी।
फ्लाईओवर की वजह से लोगों को सिग्नल फ्री आवाजाही मिलेगी
उधर इस फ्लाईओवर के बनने से होने वाले फायदों की जानकारी देते हुए PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा, 'एक बार बन जाने के बाद ये फ्लाईओवर सिग्नल-फ्री आवाजाही देंगे, ट्रैफिक की रफ्तार बढ़ाएंगे और मुख्य जंक्शनों, खासकर कैप्टन गौर मार्ग-आउटर रिंग रोड और आउटर रिंग रोड-GK-II रोड और आस-पास के इलाकों में जाम की समस्या को खत्म करेंगे।'
10 साल पहले आया था दूसरा फ्लाईओवर बनाने का आइडिया
फ्लाईओवर से जुड़ी जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों ने 10 साल पहले यानी साल 2016 में यहां दूसरे फ्लाईओवर की जरूरत को पहचाना था, और इसके बाद UTTIPEC (यूनिफाइड ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (प्लानिंग एंड इंजीनियरिंग) सेंटर) ने एक बेसिक प्लान तैयार करके दिया था, जिसके बाद उसे मंजूरी भी मिल गई थी।
अधिकारी ने बताया कि इस फ्लाईओवर के साथ ही मोदी मिल फ्लाईओवर को कालकाजी मंदिर रोड से जोड़ने के काम को भी मंजूरी दी गई थी, इस दौरान यहां 312.94 करोड़ रुपए की लागत से एक नया तीन-लेन वाला कैरिजवे बनाया जाएगा।
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