यमुना सफाई का नया ब्लूप्रिंट: 850 क्यूसेक पानी से बदलेगी सूरत, दिल्ली सरकार ने तलाशे 3 समाधान

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, अमित झा
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उत्तराखंड के रुड़की स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी ने दिल्ली में यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए जल प्रवाह बढ़ाने (850 क्यूसेक पानी) की आवश्यकता बताई है। दिल्ली सरकार ने इसके लिए 3 समाधान तलाशे हैं, जिनके माध्यम से यमुना में जल प्रवाह बढ़ाया जा सकता है।

New Delhi,India-January 11, 2026:A morning view of the polluted Yamuna River at Kalindi Kunj. Due to the high levels of ammonia and phosphates from sewage and industrial waste discharged into the river, a white, foul-smelling foam forms on some parts of the Yamuna, in New Delhi, India, on Sunday, January 11, 2026. (Photo by Sunil Ghosh / Hindustan Times)

उत्तराखंड के रुड़की स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) ने दिल्ली में यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए जल प्रवाह बढ़ाने (850 क्यूसेक पानी) की जरूरत बताई है। दिल्ली सरकार ने इसके लिए तीन समाधान तलाशे हैं, जिनके माध्यम से यमुना में जल प्रवाह बढ़ाया जा सकता है।

दिल्ली सरकार ने केंद्र को यह जानकारी देकर इसमें मदद का अनुरोध किया है। दरअसल, दिल्ली सरकार ने बीते दिनों रुड़की के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी से यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए अध्ययन करवाया था। विशेषज्ञों ने बताया कि यमुना का पर्यावरणीय प्रवाह बेहद कम है। यमुना को स्वच्छ रखने के लिए इसमें कम से कम 850 क्यूसेक जल प्रवाह होना चाहिए। अभी केवल 350 क्यूसेक जल का प्रवाह इसमें होता है, इसलिए सबसे पहले यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाना होगा ताकि उसे स्वच्छ एवं निर्मल बनाया जा सके।

दिल्ली जल बोर्ड ने इस सुझाव पर काम करते हुए यमुना में जल प्रवाह बढ़ाने के लिए हितधारकों के साथ कई बैठकें की। इनमें विस्तार से चर्चा करने के बाद कुल तीन समाधान सामने आए हैं, जिन्हें केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया है। केंद्र से अनुरोध किया गया है कि इन विकल्पों को पूरा करने में दिल्ली सरकार के लिए हरियाणा एवं यूपी सरकार से बातचीत करे। उनके सहयोग से ही इन विकल्पों को पूरा किया जा सकता है।

 Yamuna River cleaning plan

गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली में यमुना का क्षेत्र करीब 22 किलोमीटर है। यह इलाका ही सबसे ज्यादा प्रदूषित माना जाता है। इसके लिए समय-समय पर कई सरकारों ने योजना बनाईं, लेकिन गंदगी कम नहीं हो पाई।

पहला समाधान

ऊपरी गंग नहर में आने वाले पानी में से 1800 क्यूसेक जानी रेगुलेटर-हिंडन नदी-हिंडन कट कैनाल-ओखला बैराज-आगरा नहर होकर जाता है। प्रस्ताव है कि जानी रेगुलेटर से हिंडन में 1800 की जगह 1300 क्यूसेक पानी छोड़ा जाए। वहीं 500 क्यूसेक पानी मुरादनगर रेगुलेटर से नई पाइपलाइन के माध्यम से वजीराबाद पर यमुना में छोड़ा जाए, जो बहाव के रूप में यमुना से ओखला बैराज तक पहुंचे।

दूसरा उपाय

मुनक नहर पर दिल्ली सब ब्रांच नहर के माध्य से 330 क्यूसेक पानी दिल्ली को मिलता है। यहां से हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक 102 किलोमीटर की दूरी में लाइनिंग ठीक नहीं होने से 30 फीसदी (100 क्यूसेक) पानी का नुकसान होता है। इसे ठीक कर दिया जाए तो 100 क्यूसेक पानी अतिरिक्त पहुंचेगा और वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 100 क्यूसेक पानी कम उठाया जाएगा जो सीधे यमुना में जा सकेगा।

तीसरा सुझाव

केंद्र सरकार को बताया गया है कि यमुना में पानी के बहाव को बढ़ाने का एक तरीका हथिनीकुंड बैराज से इसमें पानी छोड़ने का है। हर साल मॉनसून के दौरान ऐसा किया जाता है और उसका सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलता है। केंद्र से अनुरोध किया है कि वह हरियाणा सरकार को निर्देश दे कि हथिनीकुंड बैराज से अतिरिक्त पानी का यमुना में ई-फ्लो सुनिश्चित किया जाए।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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