Golden Line Metro के बाद किन इलाकों में सबसे ज्यादा बढ़ेंगे घरों के दाम और किराया? एक्सपर्ट्स ने बताए नाम
दिल्ली मेट्रो की फेज-4 परियोजना के तहत बन रही गोल्डन लाइन दक्षिण दिल्ली के रियल एस्टेट बाजार की तस्वीर बदल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो शुरू होने के बाद कुछ इलाकों में मकानों की कीमतें 20-25% तक बढ़ सकती हैं, जबकि किराए में भी 5-15% तक उछाल आने की संभावना है।

दिल्ली मेट्रो की फेज-4 परियोजना के तहत तैयार हो रही गोल्डन लाइन (एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर) दक्षिण दिल्ली के रियल एस्टेट बाजार के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है। लंबे समय से ट्रैफिक जाम, एयरपोर्ट तक लंबा सफर और पूर्व-पश्चिम दिशा में कमजोर कनेक्टिविटी की वजह से जिन इलाकों की रियल एस्टेट ग्रोथ सीमित रही, वहां अब तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रॉपर्टी विशेषज्ञों का अनुमान है कि मेट्रो परिचालन शुरू होने के बाद कुछ माइक्रो-मार्केट में मकानों की कीमतें 20 से 25 फीसदी तक बढ़ सकती हैं।
किन इलाकों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
गोल्डन लाइन एरोसिटी से शुरू होकर महिपालपुर, वसंत कुंज, किशनगढ़, छतरपुर, इग्नू, साकेत, खानपुर, अंबेडकर नगर होते हुए तुगलकाबाद तक जाएगी। इस दौरान एरोसिटी, छतरपुर, साकेत जी-ब्लॉक और तुगलकाबाद में मौजूदा मेट्रो लाइनों से इंटरचेंज की सुविधा भी मिलेगी। इससे एयरपोर्ट, सेंट्रल दिल्ली और प्रमुख कारोबारी इलाकों तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगी।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा बढ़ सकते हैं दाम
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर चेतन चिचरा के मुताबिक, गोल्डन लाइन नई हाउसिंग डिमांड पैदा करने से ज्यादा उन इलाकों का "कनेक्टिविटी डिस्काउंट" खत्म करेगी, जो अब तक बेहतर सामाजिक सुविधाओं के बावजूद परिवहन की कमी से पीछे थे। उनके अनुसार छतरपुर, नेब सराय, साकेत, अंबेडकर नगर और संगम विहार सबसे बड़े लाभार्थी हो सकते हैं। वहीं वसंत कुंज और किशनगढ़ को एयरपोर्ट के नजदीक होने और बेहतर कनेक्टिविटी का अतिरिक्त फायदा मिलेगा।
अभी कितने हैं घरों के दाम?
रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म SouthDelhi1 के सह-संस्थापक निलेश गर्ग के मुताबिक, वसंत कुंज में इस समय फ्लैटों की कीमत करीब ₹21,000 से ₹23,500 प्रति वर्ग फुट है। साकेत में यही कीमत ₹27,500 से ₹31,500 प्रति वर्ग फुट तक पहुंचती है। दूसरी ओर, छतरपुर अभी भी अपेक्षाकृत किफायती बाजार है, जहां मकान ₹12,400 से ₹18,000 प्रति वर्ग फुट की दर से उपलब्ध हैं।
किराया भी बढ़ सकता है
गोल्डन लाइन का असर केवल मकानों की बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि किराए में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वर्तमान में साकेत में दो बेडरूम का फ्लैट करीब ₹35,000 प्रति माह पर किराए पर मिलता है, जबकि तीन बेडरूम वाले बड़े फ्लैट का किराया ₹1 लाख प्रति माह तक पहुंच जाता है।
निलेश गर्ग का अनुमान है कि मेट्रो स्टेशन से एक किलोमीटर के दायरे में स्थित अच्छी प्रॉपर्टियों की कीमत अगले दो से तीन वर्षों में 8 से 12 फीसदी तक बढ़ सकती है। वहीं किराए में 5 से 8 फीसदी तक उछाल आने की संभावना है।
12-18 महीने बाद दिखेगा सबसे बड़ा असर
चेतन चिचरा का कहना है कि मेट्रो परियोजनाओं का असर चरणबद्ध तरीके से दिखाई देता है। परियोजना की घोषणा और निर्माण के दौरान कीमतों में सीमित बढ़ोतरी होती है, लेकिन सबसे बड़ा उछाल आमतौर पर मेट्रो शुरू होने के 12 से 18 महीने बाद आता है। इसी दौरान लोग बेहतर कनेक्टिविटी का वास्तविक लाभ महसूस करते हैं और घरों की मांग तेजी से बढ़ती है।
कौन होंगे सबसे बड़े लाभार्थी?
मेट्रो चालू होने के बाद एरोसिटी, महिपालपुर और वसंत कुंज एयरपोर्ट, एविएशन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करने वाले पेशेवरों के लिए अधिक आकर्षक बन सकते हैं। वहीं साकेत, इग्नू, छतरपुर और नेब सराय छात्रों और युवा नौकरीपेशा लोगों की पसंदीदा लोकेशन बन सकते हैं, जिससे इन इलाकों में किराए की मांग भी बढ़ेगी।
हर प्रॉपर्टी को नहीं मिलेगा समान फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि गोल्डन लाइन का फायदा सभी संपत्तियों को बराबर नहीं मिलेगा। सबसे अधिक लाभ उन्हीं मकानों को मिलने की संभावना है जो मेट्रो स्टेशन से पैदल दूरी पर हों, जिनके स्वामित्व के दस्तावेज स्पष्ट हों, पार्किंग की सुविधा हो, पानी की पर्याप्त उपलब्धता हो और सड़क कनेक्टिविटी बेहतर हो। केवल उसी इलाके में स्थित होने भर से किसी संपत्ति की कीमत तेजी से नहीं बढ़ेगी।
फरीदाबाद पर भी दिख सकता है असर
हालांकि गोल्डन लाइन सीधे फरीदाबाद तक नहीं जाएगी, लेकिन तुगलकाबाद इंटरचेंज के जरिए इसका अप्रत्यक्ष लाभ फरीदाबाद को भी मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण सूरजकुंड, ग्रीन फील्ड्स और चार्मवुड विलेज जैसे इलाकों में अपेक्षाकृत किफायती और बड़े घरों की मांग बढ़ सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि केवल भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद के आधार पर निवेश न करें। किसी भी संपत्ति का चयन करते समय निर्माण की गुणवत्ता, नागरिक सुविधाएं, डेवलपर की साख और कानूनी दस्तावेजों की जांच करना भी उतना ही जरूरी है।


