घर पर बच्चे इंतजार कर रहे हैं, प्लीज मुझे जाने दो; गैंगरेप पीड़िता ने उस मनहूस रात की आपबीती सुनाई

Subodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्ली
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उसने दरिंदों से कहा कि उसके छोटे-छोटे बच्चे घर पर उसका इंतजार कर रहे हैं। प्लीज मुझे जाने दो। लेकिन, दरिंदों ने उसकी एक न सुनी और चलती बस में उसके साथ गैंगरेप करते रहे। उस मनहूस रात की कहानी सुनाते हुए पीड़िता सिहर उठी। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

घर पर बच्चे इंतजार कर रहे हैं, प्लीज मुझे जाने दो; गैंगरेप पीड़िता ने उस मनहूस रात की आपबीती सुनाई

दिल्ली के पीतमपुरा की 30 साल की महिला अपनी तीन छोटी बेटियों के पास घर पहुंचने के लिए बेताब थी। लेकिन, सरस्वती विहार बस स्टॉप पर एक सवाल ने उसकी उस रात को मनहूस रात में बदल दिया। महिला ने पुलिस को बताया कि वह उस दिन पहले सुल्तानपुरी में अपने भाई के घर गई थी, ताकि घर बदलने में उसकी मदद कर सके। देर रात घर लौटते समय उसे आउटर रिंग रोड पर सरस्वती विहार तक जाने के लिए एक ई-रिक्शा मिल गया।

उसने कहा कि सरस्वती विहार में मैं बस स्टॉप पर खड़ी थी। उसी समय एक प्राइवेट बस आकर रुकी। मैंने अंदर खड़े एक आदमी से पूछा कि टाइम क्या हुआ है। उसने मुझसे बस के अंदर आकर बात करने को कहा। इसलिए, मैं बस में चढ़ गई। पुलिस के अनुसार, उसके बस के अंदर कदम रखते ही ड्राइवर ने बस चला दी। आरोप है कि उस आदमी ने उसे बस के पिछले हिस्से की ओर धकेल दिया और चलती बस में ही उसके साथ रेप किया।

बार-बार गुहार लगाई

महिला ने बताया कि उसने आरोपी से बार-बार गुहार लगाई कि उसे जाने दिया जाए। महिला ने एचटी को बताया कि मैंने उनसे कहा कि मैं आपके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करूंगी। प्लीज़ मुझे जाने दो। घर पर मेरे तीन बच्चे मेरा इंतजार कर रहे हैं। उसने आगे आरोप लगाया कि जब बस नांगलोई रेलवे स्टेशन के पास पहुंची तो गाड़ी रोक दी गई और ड्राइवर ने भी उसके साथ रेप किया।

ड्राइवर ने भी रेप किया

महिला ने बताया कि जब वे नांगलोई रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे तो ड्राइवर ने बस रोक दी। फिर ड्राइवर ने भी मेरे साथ रेप किया। उसने बताया कि वह उन आदमियों से उसे छोड़ देने की लगातार मिन्नतें करती रही। मैंने उनसे कहा कि जो हो गया सो हो गया। मैं उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करूंगी। इसीलिए उन्होंने मुझे जाने दिया। उसके बाद मैंने पुलिस को बुलाया।

दो आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान उमेश कुमार और रामेंद्र कुमार के रूप में हुई है। दोनों की उम्र 30 साल के आसपास है और वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। अधिकारियों ने बताया कि दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

महिला का खून बह रहा था

जांचकर्ताओं ने बताया कि जब तक पुलिस मौके पर पहुंची तब तक रामेंद्र कथित तौर पर दो-तीन अन्य लोगों के साथ वहां से फरार हो चुका था, जबकि उमेश अभी भी वहीं मौजूद था। पुलिस ने तुरंत उमेश को हिरासत में ले लिया। पीड़ित महिला का खून बह रहा था। उसे मेडिकल जांच के लिए पीतमपुरा के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया।

मैं भर्ती नहीं हो सकती, क्योंकि…

खबरों के मुताबिक, डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी, लेकिन उसने मना कर दिया। उसने कहा कि मैं भर्ती नहीं हो सकती, क्योंकि मेरे पति की तबीयत ठीक नहीं है और मेरी बेटियां मेरा इंतजार कर रही हैं। महिला अपने पति और अपनी तीन बेटियों के साथ रहती है, जिनकी उम्र चार, छह और नौ साल है।

पर्दे, टिंटेड खिड़कियां और ट्रैकर गायब

इस मामले ने 2012 के दिल्ली गैंगरेप मामले के बाद लागू किए गए ट्रांसपोर्ट सुरक्षा नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ियों की खिड़कियों पर काली फिल्म और पर्दे या जाली जैसी दूसरी चीजों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। बाद में, 2016 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने सभी पब्लिक सर्विस गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी बटन लगाना अनिवार्य कर दिया था।

पुलिस ने गुरुवार को बताया कि इस मामले में शामिल बस में ये दोनों ही चीजें मौजूद नहीं थीं। जांचकर्ताओं ने आगे बताया कि दोनों आरोपियों के पास इंटर स्टेट बसें चलाने के लिए बस कंपनी द्वारा प्राप्त वैध परमिट थे।

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लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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