थाने के पास डेढ़ घंटे तक होता रहा बस में गैंगरेप, दिल्ली में फिर ‘निर्भया’ जैसा कांड; सुरक्षा पर सवाल
दिल्ली में एक बार फिर निर्भया जैंसे कांड को दोहराया गया। चलती बस में महिला से गैंगरेप करने के बाद उसे फेंक दिया गया। पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, बस डेढ़ घंटे से भी ज्यादा समय तक नांगलोई थाने से महज कुछ दूरी पर खड़ी रही, जहां महिला के साथ गैंगरेप किया गया।

दिल्ली में एक बार फिर निर्भया जैंसे कांड को दोहराया गया। चलती बस में महिला से गैंगरेप करने के बाद उसे फेंक दिया गया। पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, बस डेढ़ घंटे से भी ज्यादा समय तक नांगलोई थाने से महज कुछ दूरी पर खड़ी रही, जहां महिला के साथ गैंगरेप किया गया।
पास में ही पीसीआर वैन खड़ी थी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि जिस महिला के साथ कथित तौर पर एक स्लीपर बस में दो लोगों ने गैंगरेप किया था, वह आउटर दिल्ली के सरस्वती विहार बस स्टैंड से बस में चढ़ी थी। सरस्वती विहार बस स्टैंड पर कई सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। जब महिला आधी रात के आसपास बस में चढ़ी तो पास में ही एक पीसीआर वैन खड़ी थी। बस ने सात किलोमीटर का जो रास्ता तय किया, उस पूरे रास्ते पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। इसी रास्ते के बाद महिला को नांगलोई रेलवे स्टेशन के पास उतार दिया गया था।
700 मीटर की दूरी पर था थाना
पुलिस के अनुसार, बस कैमरे में सरस्वती विहार से दीपाली चौक मेट्रो स्टेशन की ओर जाते हुए और फिर मंगोलपुरी फ्लाईओवर पर चढ़ते हुए कैद हुई। पुलिस ने बताया कि इसके बाद बस दाईं ओर पीरागढ़ी की तरफ मुड़ी और पीरागढ़ी तथा उद्योग नगर मेट्रो स्टेशनों से गुजरी। बस को नांगलोई रेलवे स्टेशन के पास नांगलोई रेलवे रोड तक पहुंचने में लगभग 45 मिनट लगे। पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, बस वहां डेढ़ घंटे से भी ज्यादा समय तक खड़ी रही। इसी दौरान कथित तौर पर महिला के साथ गैंगरेप किया गया। नांगलोई रेलवे स्टेशन, नांगलोई थाना और डीसीपी (आउटर नॉर्थ) के दफ्तर से महज 700 मीटर की दूरी पर स्थित है।
पीसीआर हेल्पलाइन पर कॉल किया
तकरीबन 2:30 बजे सीसीटीवी कैमरों में एक महिला को बस से उतरते हुए देखा गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसके बाद महिला ने पीसीआर हेल्पलाइन पर कॉल किया, जिसके बाद पुलिस की एक टीम वहां पहुंच गई। उसे नांगलोई थाने ले जाया गया, जहां उसने शिकायत दर्ज कराई।
आप ने सुरक्षा पर सवाल उठाए
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि पुलिस ने इस मामले का खुलासा पहले क्यों नहीं किया। उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा कि हम पुलिस कमिश्नर से पूछना चाहते हैं कि रानी बाग जैसे सेंट्रल इलाके में एक बस घंटों तक कैसे चलती रही, जबकि कथित तौर पर एक महिला के साथ गैंगरेप हुआ और बाद में उसे बस से बाहर फेंक दिया गया। वहीं, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि हमने निर्भया कांड से कुछ नहीं सीखा। यह घटना पूरे समाज पर एक कलंक है।
दिल्ली में बीजेपी के सारे इंजन ठपः सिसोदिया
आप नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने एक्स पर लिखा कि दिल्ली में एक और निर्भया कांड! चलती बस में फिर से गैंगरेप! दिल्ली में बीजेपी के सारे इंजन ठप पड़ गए हैं। लड़कियां स्कूलों में सुरक्षित नहीं हैं, बसों में सुरक्षित नहीं हैं! आप नेता ने 2012 के दिल्ली गैंगरेप कांड का ज़िक्र भी किया, जब 16 दिसंबर की रात को दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस के अंदर छह लोगों ने 23 साल की एक पैरामेडिक छात्रा निर्भया के साथ बेरहमी से मारपीट करने और गैंगरेप करने के बाद सड़क पर फेंक दिया था। बाद में 29 दिसंबर को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


